
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली में सितंबर 2025 में हुई हिंसा के मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने यह आदेश सोमवार को पारित किया, जिसकी जानकारी मंगलवार को सामने आई।
कोर्ट ने मामले में ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे को लेकर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इस तरह का नारा कानून के अधिकार और भारत की संप्रभुता एवं अखंडता को चुनौती देने वाला है। कोर्ट ने इसकी तुलना ‘अल्लाहु अकबर’, ‘जय श्री राम’, ‘हर हर महादेव’ और ‘सत श्री अकाल’ जैसे धार्मिक नारों से करने से भी इनकार किया।
कोर्ट ने नारे को धार्मिक नारों से अलग बताया
अदालत के मुताबिक, ‘अल्लाहु अकबर’, ‘जय श्री राम’, ‘हर हर महादेव’ और ‘सत श्री अकाल’ जैसे नारे संबंधित ईश्वर या गुरु के प्रति सम्मान और आस्था व्यक्त करते हैं। इसके विपरीत ‘सर तन से जुदा’ नारे को कोर्ट ने कानून की सत्ता को चुनौती देने वाला माना। अदालत ने कहा कि ऐसा नारा लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने वाला हो सकता है।
26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई थी हिंसा
यह मामला 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, तौकीर रजा ने जुमे की नमाज के बाद इस्लामिया इंटर कॉलेज परिसर में लोगों के जुटने का आह्वान किया था। प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने और निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचने के लिए निकले।
पुलिस के मुताबिक, भीड़ को रोकने के दौरान स्थिति बिगड़ गई और पथराव, पुलिसकर्मियों पर हमले तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं। अभियोजन ने तौकीर रजा को मामले में मुख्य साजिशकर्ता बताया है।
तौकीर रजा की दलील क्या थी?
जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि तौकीर रजा हिंसा वाली जगह पर मौजूद नहीं थे। उनके वकीलों के अनुसार, उन्हें घटना से पहले ही घर में नजरबंद कर दिया गया था और उन्होंने हिंसा के लिए कोई भाषण या सीधा आह्वान नहीं किया था। हाईकोर्ट ने माना कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे, लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद अन्य परिस्थितियों और लोगों को एकत्र होने के लिए दिए गए कथित आह्वान को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने घटना के बाद उनके भाषण का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर भीड़ के जुटने पर प्रतिक्रिया दी गई थी।
चार्जशीट दाखिल, आरोप अभी तय नहीं
मामले में 21 दिसंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, लेकिन तौकीर रजा के खिलाफ आरोप अभी तय नहीं हुए हैं। अदालत ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देने से इनकार कर दिया, तौकीर रजा अक्टूबर 2025 से जेल में हैं। ताजा आदेश के बाद बरेली हिंसा मामले में उन्हें फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है।



