हत्याकांड से -अस्पताल तक

मेरठ/गाजियाबाद। युवा शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अधिवक्ता रवि गौतम को लेकर मेरठ से शुरू हुआ विवाद अब गाजियाबाद के अस्पताल तक पहुंच गया है। 8 जुलाई को बीए छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से शुरू हुआ यह मामला पुलिस कार्रवाई, धरने, भूख हड़ताल और देर रात धरनास्थल खाली कराए जाने के बाद अब अस्पताल में पुलिस और समर्थकों के बीच हुई भिड़ंत तक पहुंच चुका है। शुक्रवार को गाजियाबाद के संतोष अस्पताल में रवि गौतम के समर्थकों और पुलिस के बीच हुए हंगामे के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। घटना से जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।

मामले की शुरुआत 8 जुलाई को मेरठ में हुई, जब बीए छात्रा ललिता गौतम की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर रवि गौतम के नेतृत्व में परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों ने हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। कलेक्ट्रेट का गेट बंद किए जाने के बाद प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए। सड़क पर जाम और हंगामे की स्थिति बनने पर पुलिस मौके पर पहुंची। तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय भी पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। रवि गौतम भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे।

इसी दौरान हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार का एक वीडियो सामने आया। वीडियो में तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय को बंदी वाहन में रवि गौतम के साथ मारपीट करते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया। पुलिस की ओर से उस समय कहा गया था कि हिरासत में मौजूद एक व्यक्ति ने वाहन के भीतर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद एसएसपी मौके पर पहुंचे थे।

8 जुलाई की घटना के बाद पुलिस ने रवि गौतम समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद रवि गौतम ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही। उन्होंने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके समेत आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग उठाई। संगठन की ओर से भी इन मांगों को लेकर लगातार आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया गया।

मांगों को लेकर रवि गौतम ने 20 अगस्त से मेरठ के कमिश्नरी पार्क में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। उन्होंने कहा कि जब तक संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 24 अगस्त को रवि गौतम समेत पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नए एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति से मुलाकात की और अपनी मांगें उनके सामने रखीं। संगठन का दावा था कि उन्हें कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन बाद में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया।

मांगें पूरी नहीं होने के आरोप के बीच 30 अगस्त को महापंचायत आयोजित की गई। इसके बाद 3 सितंबर से रवि गौतम ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। भूख हड़ताल के दौरान प्रशासन की ओर से उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही थी। वहीं रवि गौतम और उनके समर्थक मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े रहे।

4 सितंबर की देर रात करीब 2:40 बजे पुलिस कई थानों की फोर्स के साथ मेरठ के कमिश्नरी पार्क पहुंची। पुलिस ने रवि गौतम और उनके समर्थकों को धरनास्थल से हटाया। इस दौरान करीब 15 से 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने धरनास्थल पर लगा टेंट भी हटवा दिया। पुलिस का कहना था कि रवि गौतम की तबीयत खराब हो गई थी और उन्हें चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत थी। दूसरी ओर, संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए रवि गौतम को जबरन धरने से उठाया।

इसके बाद पुलिस रवि गौतम को गाजियाबाद के संतोष अस्पताल लेकर पहुंची। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और आईसीयू में रखा गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद उनके समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। समर्थकों ने रवि गौतम से मिलने की मांग की, लेकिन आईसीयू में भर्ती होने के कारण शुरुआत में उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। इससे अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। करीब दो घंटे तक अस्पताल में तनावपूर्ण माहौल रहा। बाद में पुलिस और अस्पताल प्रबंधन से बातचीत के बाद कुछ समर्थकों को रवि गौतम से मिलने की अनुमति दी गई।

शुक्रवार शाम अस्पताल में एक बार फिर स्थिति बिगड़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, रवि गौतम ने ड्रिप हटाकर अस्पताल से बाहर जाने की कोशिश की। उन्होंने अस्पताल में भर्ती किए जाने का विरोध किया। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उनके समर्थक भी सामने आ गए। इसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की और हाथापाई की स्थिति बन गई। कुछ समर्थक रवि गौतम को आईसीयू से बाहर ले जाने की कोशिश करते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोककर रवि गौतम को वापस आईसीयू में पहुंचाया। इस पूरी घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

पुलिस की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि हंगामे के दौरान कुछ समर्थकों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की। पुलिस के मुताबिक, यदि अस्पताल प्रबंधन की ओर से शिकायत मिलती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, रवि गौतम के समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी इच्छा के खिलाफ इलाज कराया जा रहा है।

युवा शक्ति दल के महासचिव अरविंद गौतम का कहना है कि रवि गौतम को जबरन धरनास्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। संगठन का दावा है कि रवि गौतम की तबीयत ठीक है और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मेरठ में दोबारा धरना शुरू किया जाएगा। वहीं पुलिस का कहना है कि रवि गौतम को उनकी चिकित्सकीय जरूरत को देखते हुए अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में समर्थकों ने उन्हें जबरन अस्पताल से बाहर ले जाने की कोशिश की।

फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। एक ओर रवि गौतम के समर्थक इसे आंदोलन को दबाने की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि पुलिस इसे स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता और कानून-व्यवस्था से जोड़कर देख रही है। 8 जुलाई से शुरू हुआ यह विवाद अब मेरठ से निकलकर गाजियाबाद तक पहुंच चुका है और अस्पताल में हुई झड़प के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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