बुलडोजर एक्शन पर मायावती का मौनव्रत टूटा

लखनऊ। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मस्जिदों को अवैध बताकर की जा रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। मायावती ने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद समेत प्रदेश में कई धार्मिक स्थलों को जल्दबाजी में अवैध घोषित कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में ध्वस्तीकरण के बजाय बातचीत और अन्य कानूनी विकल्पों के जरिए समाधान तलाशने की अपील की।

मायावती ने कहा कि संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों और उनके धार्मिक स्थलों के प्रति समान व्यवहार सुनिश्चित करे। उन्होंने धार्मिक मामलों में कानून और संवैधानिक व्यवस्था का पालन किए जाने पर जोर दिया। बसपा प्रमुख के मुताबिक, धार्मिक स्थलों को लेकर इस तरह की कार्रवाई से सामाजिक माहौल संवेदनशील हो सकता है। उन्होंने सरकार से ऐसे अभियानों पर रोक लगाने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने की मांग की।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर विवाद जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध निर्माण से जुड़ा था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई 2026 में मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। मामले में करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भी आदेश दिया गया था। मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी थी।

जिला अदालत में सुनवाई के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया। इसके बाद प्रशासन ने 5 सितंबर को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त करने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के गेट बंद कर दिए गए और बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी तथा आरएएफ के जवानों को तैनात किया गया। प्रशासन ने कहा कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अदालत के आदेशों के अनुपालन में की गई।

मस्जिद गिराए जाने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया और धार्मिक स्थल को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने भी कार्रवाई के दौरान खुद को अपने आवास पर रोके जाने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं, वहीं प्रशासन की ओर से लगातार कहा गया है कि मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।

मायावती की प्रतिक्रिया के बाद सहारनपुर मस्जिद का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया है। बसपा प्रमुख ने जहां धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचने

Related Articles

Back to top button