
लखनऊ। उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सड़क परिवहन को और मजबूत करने की तैयारी है। दोनों राज्यों के परिवहन विभागों के बीच हुई बैठक में 14 नए मार्गों पर बस सेवा शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके बाद यूपी और बिहार के बीच बसों का नेटवर्क मौजूदा 25 मार्गों से बढ़कर 39 मार्गों तक पहुंच जाएगा। यह फैसला लखनऊ में उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह और बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत की बैठक में लिया गया।
बैठक में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों की बसों के किराये में समानता लाने पर भी सहमति बनी। नए मार्गों को अंतिम रूप देने से पहले दोनों राज्यों के अधिकारी प्रस्तावित रूटों की समीक्षा करेंगे। इसके लिए जल्द ही दूसरे चरण की बैठक होगी, जिसमें मार्गों और उनकी दूरी का तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। नए विकसित हाईवे और प्रमुख सड़क गलियारों को भी बस नेटवर्क से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।
नई बस सेवाओं का सबसे ज्यादा फायदा यूपी-बिहार सीमा से जुड़े जिलों के यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। दोनों राज्यों के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार, शिक्षा और धार्मिक यात्राओं के लिए आवागमन करते हैं। बेहतर अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी से ऐसे यात्रियों को अतिरिक्त परिवहन विकल्प मिलेंगे।
बैठक में अयोध्या को बिहार के सीतामढ़ी और गया से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा बिहार के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को उत्तर प्रदेश के शहरों से जोड़ने पर विचार किया गया। अधिकारियों का मानना है कि नई बस सेवाओं से यात्रियों की सुविधा बढ़ने के साथ धार्मिक पर्यटन और दोनों राज्यों के बीच आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।



