
प्रयागराज। SC/ST अदालत ने कौशांबी में CO ट्रैफिक के पद पर तैनात सत्येंद्र प्रसाद तिवारी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही अगले आदेश तक उनका वेतन रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मामला 2018 के एक SC/ST एक्ट मुकदमे से जुड़ा है। उस समय सत्येंद्र प्रसाद तिवारी इस केस के विवेचक थे और उनकी गवाही अदालत में होनी है। वाराणसी के विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) सुधाकर राय की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही है।
तीन बार बुलाने के बाद भी नहीं पहुंचे
अदालत के मुताबिक, सत्येंद्र तिवारी को पहली बार 13 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही के लिए बुलाया गया था। वह उस दिन तिरंगा यात्रा में ड्यूटी का हवाला देते हुए उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद 24 अगस्त को उन्हें दोबारा VC के जरिए गवाही के लिए बुलाया गया, लेकिन वह इस तारीख पर भी अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद कोर्ट ने 1 सितंबर को गवाही के लिए तारीख तय की, लेकिन इस दिन भी उनकी उपस्थिति नहीं हुई। लगातार गैरहाजिरी को अदालत ने गंभीरता से लिया।
10 सितंबर को कोर्ट में पेश करना होगा
लगातार गैरहाजिरी के बाद वाराणसी की विशेष अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को सत्येंद्र प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर को न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है, इसके अलावा चीफ ट्रेजरी ऑफिसर को उनके वेतन का आहरण अगले आदेश तक रोकने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी मांगी है।
पटाखा फैक्ट्री हादसे से अलग है मामला
सत्येंद्र प्रसाद तिवारी हाल ही में कौशांबी-प्रयागराज सीमा पर हुए पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के बाद चर्चा में आए थे। हादसे में पीड़ित परिवारों से मिलने का उनका वीडियो भी वायरल हुआ था। हालांकि उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी का यह आदेश पटाखा फैक्ट्री हादसे से संबंधित नहीं है। यह कार्रवाई 2018 के पुराने मुकदमे में गवाही के लिए लगातार अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण हुई है।



