सिक्स लेन हाईवे से बदलेगी, 500 गांवों की तस्वीर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के तहत राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़ा सड़क नेटवर्क विकसित करने की तैयारी है। ‘राज्य राजधानी माला’ परियोजना के तहत रायबरेली के लालगंज से बाराबंकी तक करीब 105-106 किलोमीटर लंबा छह लेन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर आगे लखनऊ समेत राजधानी क्षेत्र के कई प्रमुख मार्गों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।

परियोजना का पहला हिस्सा लालगंज-रायबरेली-हैदरगढ़-बाराबंकी मार्ग को जोड़ने वाला होगा। इसका उद्देश्य मौजूदा सड़कों को अपग्रेड कर क्षेत्रीय यातायात के लिए एक वैकल्पिक और बेहतर मार्ग उपलब्ध कराना है। परियोजना को ब्राउनफील्ड मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है, यानी जहां संभव होगा वहां मौजूदा सड़कों को चौड़ा और आधुनिक बनाकर छह लेन में बदला जाएगा।

उपलब्ध योजना के अनुसार पहले चरण में करीब 105 किलोमीटर के कॉरिडोर को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लगभग 2,100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है और इसे करीब पांच वर्ष में पूरा करने की योजना सामने आई थी। बाद के विस्तृत प्रस्तावों में इस दक्षिणी हिस्से की लंबाई करीब 106 किलोमीटर और लागत करीब 5,865 करोड़ रुपये बताई गई है, इसलिए परियोजना के अंतिम डीपीआर और लागत में बदलाव संभव है।

पूरी ‘राज्य राजधानी माला’ योजना केवल रायबरेली और बाराबंकी तक सीमित नहीं है। इसके दूसरे हिस्से में बाराबंकी से बिसवां, सीतापुर, हरदोई और संडीला तक कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। दोनों हिस्सों के पूरा होने पर लखनऊ के चारों ओर क्षेत्रीय यातायात के लिए एक बड़ा वैकल्पिक मार्ग तैयार होगा।

इस परियोजना की जरूरत का बड़ा कारण लखनऊ और आसपास के जिलों के बीच लगातार बढ़ता यातायात है। उपलब्ध ट्रैफिक अध्ययन में लखनऊ-बाराबंकी के बीच करीब 50 हजार, लखनऊ-उन्नाव और लखनऊ-संडीला के बीच करीब 40-40 हजार, उन्नाव-रायबरेली के बीच करीब 35 हजार और रायबरेली-बाराबंकी के बीच करीब 23 हजार दैनिक ट्रिप दर्ज किए गए हैं।

नया कॉरिडोर तैयार होने के बाद ऐसे वाहनों को लखनऊ शहर के अंदर से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है, जो एक जिले से दूसरे जिले की ओर जा रहे हैं। इससे राजधानी की प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक दबाव, जाम और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

परियोजना का असर केवल यातायात तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। बेहतर सड़क संपर्क से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक गतिविधियों और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। राजधानी क्षेत्र से जुड़े कस्बों और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

राज्य राजधानी माला’ के तहत प्रस्तावित पूरे क्षेत्रीय नेटवर्क में लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर और हरदोई जैसे जिले शामिल हैं। परियोजना का अंतिम स्वरूप, चरणवार निर्माण और लागत संबंधित डीपीआर तथा सरकारी मंजूरियों के आधार पर तय किया जाएगा।

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