
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रहे सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पुलिस ने अब अपनी रणनीति को पूरे प्रदेश में विस्तार दे दिया है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना के दायरे को बढ़ाते हुए इसे प्रदेश के 59 जिलों तक लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 213 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या अधिक रही है। इन संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने और हादसों की वजहों को खत्म करने के लिए कुल 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों का गठन किया गया है।
20 जिलों में दिखा था योजना का असर
पुलिस के मुताबिक ZFD योजना को पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों में लागू किया गया था। इस दौरान दुर्घटना बहुल इलाकों पर लगातार निगरानी, हादसों के कारणों का विश्लेषण और संबंधित विभागों के साथ समन्वय जैसी गतिविधियों पर फोकस किया गया। शुरुआती चरण के परिणाम सामने आने के बाद पुलिस ने इस मॉडल को बाकी जिलों तक पहुंचाने का फैसला किया है। अब तीसरे और चौथे चरण में योजना का विस्तार करते हुए 59 जिलों को इसके दायरे में शामिल किया गया है।
दुर्घटना वाले स्थानों पर लगातार रहेगी नजर
नई व्यवस्था के तहत क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें अपने-अपने क्षेत्र में दुर्घटना बहुल स्थानों की नियमित निगरानी करेंगी। टीमों का काम सिर्फ हादसे के बाद मौके पर पहुंचने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुर्घटनाओं के पीछे मौजूद कारणों की पहचान कर उन्हें दूर कराने पर भी जोर दिया जाएगा। सड़क की खराब स्थिति, यातायात व्यवस्था में कमी, तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना और अन्य जोखिम वाले कारणों को चिन्हित कर संबंधित विभागों के साथ मिलकर सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस मुख्यालय में हुई विशेष कार्यशाला
ZFD योजना को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने और टीमों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए पुलिस मुख्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेशभर से गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान, हादसों के कारणों का अध्ययन, निगरानी व्यवस्था और सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
हादसों की वजह तलाशकर होगी कार्रवाई
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि दुर्घटना बहुल स्थानों को केवल आंकड़ों के आधार पर न देखा जाए, बल्कि वहां होने वाले हादसों के पैटर्न और उनके वास्तविक कारणों का भी अध्ययन किया जाए। इसके बाद स्थानीय स्तर पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जरूरी सुधार कराए जाएं। पुलिस की कोशिश है कि दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय हादसे की संभावना को पहले ही कम किया जाए।
बेहतर काम करने वाली टीमों को सम्मान
कार्यशाला के दौरान डीजीपी राजीव कृष्ण ने सड़क हादसों की रोकथाम में बेहतर प्रदर्शन करने वाली क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के काम की सराहना की। उत्कृष्ट कार्य करने वाली टीमों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मैदानी स्तर पर सक्रिय निगरानी और जिम्मेदारी तय होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की मुहिम को और मजबूती मिलेगी।
59 जिलों में लागू होगा मॉडल
ZFD योजना के विस्तार के साथ अब प्रदेश के 59 जिलों में चिन्हित दुर्घटना बहुल स्थानों पर विशेष निगरानी व्यवस्था तैयार हो गई है। 213 संवेदनशील स्थानों और 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के जरिए पुलिस सड़क हादसों को कम करने के लिए लगातार कार्रवाई करेगी। योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्घटनाओं के कारणों को समय रहते पहचानना, जोखिम वाले स्थानों में सुधार कराना और सड़क पर होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर तक लाना है।



