
शामली। उत्तर प्रदेश के शामली में आयुष मलिक से जुड़े धर्म परिवर्तन मामले में अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट पुलिस कार्रवाई की वजह बनी हैं। पुलिस ने छह सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि इन अकाउंट्स से इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर ऐसी जानकारी साझा की गई, जिसे पुलिस ने गलत और भ्रामक बताया है।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट के जरिए यह धारणा बनाने की कोशिश की गई कि हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान शामली पुलिस को फटकार लगाई थी। पुलिस ने इस दावे को खारिज करते हुए संबंधित अकाउंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
हाईकोर्ट में हुई थी आयुष की पेशी
आयुष मलिक से जुड़ा मामला पहले से ही चर्चा में है। मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका के जरिए आयुष को अदालत के सामने पेश कराने और उनकी इच्छा के बारे में जानकारी लेने की मांग की गई थी। कोर्ट के निर्देश के बाद आयुष मलिक और उनके पिता को 16 सितंबर को अदालत के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के दौरान आयुष का पक्ष भी सामने आया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अपने निजी फैसलों और धर्म को लेकर अपनी इच्छा अदालत के सामने बताई। अदालत की कार्यवाही के बाद सोशल मीडिया पर मामले से जुड़ी कई तरह की पोस्ट सामने आने लगीं। इन्हीं में कुछ पोस्ट ऐसी थीं, जिन पर शामली पुलिस ने आपत्ति जताई।
पुलिस ने छह सोशल मीडिया अकाउंट को बनाया आरोपी
शामली पुलिस के मुताबिक, कथित भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वाले छह सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें एक्स और फेसबुक के अकाउंट शामिल हैं। पुलिस अब संबंधित पोस्ट की सामग्री, उनके प्रसार और पोस्ट करने वाले अकाउंट्स की भूमिका की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी का मूल स्रोत क्या था और उसे किस संदर्भ में पोस्ट किया गया।
पुलिस ने हाईकोर्ट की कार्रवाई को लेकर किया स्पष्टीकरण
पुलिस की ओर से कहा गया है कि सोशल मीडिया पर हाईकोर्ट की कार्यवाही को लेकर किए गए कुछ दावे वास्तविक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते। पुलिस ने विशेष रूप से उस दावे पर सफाई दी है जिसमें अदालत द्वारा पुलिस को फटकार लगाए जाने की बात कही गई थी। पुलिस के अनुसार, अदालत की कार्यवाही को गलत तरीके से पेश करने वाली पोस्ट से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
जून में शुरू हुआ था पूरा विवाद
आयुष मलिक प्रकरण की शुरुआत जून में हुई थी। उनके पिता देवराज मलिक की शिकायत पर शामली पुलिस ने धर्म परिवर्तन से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया था। शिकायत में चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार किया था। बाद में दोनों को अदालत से जमानत मिल गई। इसके बाद आयुष से जुड़े घटनाक्रम को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
अब सोशल मीडिया पोस्ट की जांच
हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर जोर पकड़ा। अलग-अलग अकाउंट्स से सुनवाई और पुलिस की भूमिका को लेकर दावे किए गए। पुलिस ने इनमें से कुछ दावों को गलत बताते हुए मुकदमा दर्ज किया है।
फिलहाल जांच का फोकस सोशल मीडिया पोस्ट और उनके पीछे मौजूद तथ्यों पर है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित भ्रामक जानकारी किस आधार पर साझा की गई और इसे कितने लोगों तक पहुंचाया गया।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि आयुष मलिक मामले से जुड़ी किसी भी जानकारी को सत्यापित किए बिना सोशल मीडिया पर शेयर न करें और आधिकारिक जानकारी को ही प्राथमिकता दें।



