
लखनऊ। अलीगंज में लंबे समय से चले आ रहे अवैध निर्माणों पर एलडीए ने सख्ती बढ़ा दी है। करीब 25 साल पुराने निर्माणों को लेकर अब उन्हें नियमों के दायरे में लाने की कवायद भी तेज हो गई है। क्षेत्र में चिन्हित 51 अवैध इमारतों में से 30 भवन मालिकों ने शमन मानचित्र के लिए आवेदन किया है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी हलचल
अवैध निर्माणों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भवन मालिकों में कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी बीच शमन के जरिए निर्माण को वैध कराने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में तेजी आई है। एलडीए अब आवेदनों की जांच कर यह तय करेगा कि किन निर्माणों को मौजूदा नियमों के तहत राहत दी जा सकती है।
90 फीसदी से ज्यादा भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां
अलीगंज की प्रमुख सड़कों पर आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक इस्तेमाल का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि मुख्य मार्गों पर 90 फीसदी से अधिक आवासीय भूखंडों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके चलते भवन उपयोग और निर्माण नियमों के पालन को लेकर एलडीए की कार्रवाई तेज हुई है।
नई उपविधि से कुछ निर्माणों को राहत
नई भवन निर्माण उपविधि के तहत 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क पर स्थित भूखंडों में व्यावसायिक निर्माण के लिए राहत का प्रावधान है। वहीं, 12 मीटर तक चौड़ी सड़क वाले भूखंडों पर भी निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत शमन मानचित्र के जरिए निर्माण को वैध कराने का विकल्प उपलब्ध है। इसी प्रावधान के चलते कई भवन मालिक अब एलडीए का रुख कर रहे हैं।
17 इमारतें सील, बाकी पर कार्रवाई जारी
एलडीए की ओर से चिन्हित 51 अवैध इमारतों में से 17 को सील किया जा चुका है। बाकी इमारतों की जांच और कार्रवाई भी जारी है। प्राधिकरण यह देख रहा है कि कौन से निर्माण शमन के योग्य हैं और किन मामलों में सीलिंग या अन्य कार्रवाई जरूरी होगी। ऐसे में अलीगंज में एक तरफ अवैध निर्माणों पर एलडीए का शिकंजा कस रहा है, तो दूसरी ओर भवन मालिक उन्हें वैध कराने के लिए शमन प्रक्रिया का सहारा ले रहे हैं।



