
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 7 सितंबर के अपडेट के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश में 7, 8 और 9 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि 10 सितंबर से फिलहाल कोई भारी बारिश की चेतावनी नहीं है। पश्चिमी यूपी के लिए इस समय उपखंड स्तर पर भारी बारिश की चेतावनी नहीं है, हालांकि पहले हुई तेज बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।
पिछले 24 घंटों में पश्चिमी यूपी के कई हिस्सों में बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया। बरेली में बारिश बेहद तेज रही और सोमवार सुबह तक लगातार पानी बरसता रहा। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक बरेली में बारिश ने पिछले 14 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया और शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया।
बारिश के कारण बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, बिजनौर और संभल समेत कई जिलों में स्कूलों को लेकर प्रशासन को एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं। 7 सितंबर को कुछ जिलों में कक्षा आठ तक के स्कूल बंद रखने का आदेश दिया गया है, जबकि संभल में कक्षा 12 तक के स्कूलों की छुट्टी की जानकारी सामने आई है। जिलों में अवकाश का दायरा स्थानीय प्रशासन के आदेश के अनुसार अलग-अलग है।
मौसम विभाग के अनुसार नेपाल सीमा से लगे तराई क्षेत्र में बारिश सबसे ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, लखीमपुर खीरी, सिद्धार्थनगर, सीतापुर और श्रावस्ती जैसे जिलों में भारी बारिश को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। हरदोई और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। लगातार बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी का खतरा बना रहेगा।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, संत कबीरनगर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, अयोध्या, बाराबंकी और अंबेडकरनगर समेत कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ सकती हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर आंधी और बिजली चमकने की स्थिति भी बन सकती है।
राजधानी लखनऊ में भी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। बारिश के चलते शहर के कुछ हिस्सों में जलभराव की समस्या सामने आई है। हालांकि मौजूदा आधिकारिक चेतावनी में पूर्वी यूपी को ज्यादा संवेदनशील माना गया है। राजधानी और मध्य यूपी में मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ बीच-बीच में बारिश जारी रह सकती है।
बारिश के पीछे सक्रिय मौसम प्रणालियों का भी असर है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र तथा उससे जुड़े परिसंचरण के कारण प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नमी और बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। इसके चलते पूर्वी और तराई क्षेत्रों में मौसम ज्यादा सक्रिय बना हुआ है।
बाढ़ की स्थिति पहले से ही कई इलाकों में चिंता का कारण बनी हुई है। हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में राहत और बचाव अभियान जारी है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार अब तक 19,454 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 5.94 लाख से अधिक लंच पैकेट और 1.03 लाख से ज्यादा राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। राहत एवं बचाव अभियान में 2,075 नावों और मोटरबोट का इस्तेमाल किया गया है।
पूर्वी यूपी में नदियों का बढ़ता जलस्तर भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। पिछले दिनों गंगा, घाघरा और दूसरी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से कई जिलों में बाढ़ का असर दिखाई दिया। बलिया, गाजीपुर, गोरखपुर, मऊ और देवरिया में बड़े क्षेत्र में पानी भरने की स्थिति सामने आई थी।
तराई क्षेत्र के लिए नेपाल और पहाड़ी इलाकों में होने वाली बारिश भी महत्वपूर्ण है। वहां भारी बारिश होने पर नदियों और बैराजों में पानी बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर नेपाल सीमा से सटे यूपी के जिलों पर पड़ता है। इसलिए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
आने वाले 48 से 72 घंटे यूपी के लिए महत्वपूर्ण हैं। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 9 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी बनी हुई है, जबकि इसके बाद फिलहाल भारी बारिश का कोई उपखंड-स्तरीय अलर्ट नहीं है।
बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान लोगों को खुले मैदान, पेड़ के नीचे, नदी-नालों और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने की सलाह है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवार जरूरी सामान और मोबाइल फोन चार्ज रखकर स्थानीय प्रशासन की सूचना पर नजर रखें। किसानों को भी खेतों में जलभराव और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, यूपी में इस समय सबसे ज्यादा चिंता तराई और पूर्वांचल को लेकर है। पूर्वी यूपी में तीन दिन भारी बारिश की आधिकारिक चेतावनी है, जबकि पश्चिमी जिलों में पहले से हुई बारिश के कारण जलभराव और बाढ़ का असर बना हुआ है। स्कूल बंद करने के स्थानीय फैसले और राहत-बचाव अभियान बताते हैं कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अगले कुछ दिनों में बारिश की दिशा और नदियों के जलस्तर के आधार पर हालात में बदलाव हो सकता है।



