क्या विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव सम्भव ?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। चुनाव की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं होने से पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों और संगठनों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी कड़ी में पंचायत अधिकार संघ ने लखनऊ में प्रदर्शन कर सरकार से चुनाव कार्यक्रम जल्द जारी करने की मांग तेज कर दी है।

संघ का कहना है कि पंचायत चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी कड़ी हैं और इनके कार्यक्रम को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता ग्रामीण क्षेत्रों में असमंजस पैदा कर रही है। संगठन चुनाव की तारीख के साथ आरक्षण, मतदाता सूची और चुनाव की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है।

पंचायत अधिकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप पटेल के अनुसार, संगठन की ओर से 7 सितंबर को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात का कार्यक्रम रखा गया है। प्रतिनिधिमंडल चुनाव में देरी, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और पंचायतों से जुड़े अन्य मुद्दों को सरकार के सामने रखेगा। संघ का कहना है कि सरकार को चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि संभावित प्रत्याशियों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच बना असमंजस खत्म हो सके।

7 सितंबर तक पंचायत चुनाव की कोई अंतिम आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। अलग-अलग माध्यमों और सोशल मीडिया पर संभावित तारीखों की चर्चाएं जरूर चल रही हैं, लेकिन उन्हें आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम नहीं माना जा सकता। राज्य के पंचायत चुनाव से संबंधित तैयारियां जारी हैं, मगर मतदान की अंतिम तारीख का ऐलान अभी बाकी है।

पंचायत चुनाव को लेकर चल रहे कानूनी मामले में अब 9 सितंबर 2026 की तारीख भी महत्वपूर्ण हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पंचायत चुनाव और उससे जुड़े मुद्दों पर अगली सुनवाई 9 सितंबर को होनी है। इससे पहले प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी थी, जिसके बाद अगली तारीख तय की गई। इस सुनवाई पर चुनाव की तैयारी कर रहे लोगों और संगठनों की नजर बनी हुई है।

इससे पहले हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पंचायत चुनाव से जुड़ी सुनवाई के दौरान चुनाव की समयसीमा को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आई थीं। सरकार की ओर से अदालत में चुनाव प्रक्रिया और निर्धारित समयसीमा को लेकर जानकारी दी गई थी। ऐसे में नवंबर 2026 से जुड़ी समयसीमा भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पंचायत चुनाव में देरी के विरोध में लखनऊ में पहले भी प्रदर्शन हो चुके हैं। 30 अगस्त को अखिल भारतीय प्रधान संगठन से जुड़े संभावित प्रत्याशियों ने चुनाव जल्द कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोककर कई लोगों को हिरासत में लिया था। प्रदर्शनकारियों ने ‘चुनाव नहीं तो वोट नहीं’ का नारा भी लगाया था।

चुनाव जल्द कराने की मांग को लेकर अधिकार संगठनों का आंदोलन भी जारी है। अगस्त में राष्ट्रीय अधिकार संघ ने ईको गार्डन में धरना दिया था और बाद में आमरण अनशन शुरू करने की जानकारी सामने आई थी। संगठन ने मांग की थी कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 26 नवंबर 2026 से पहले कराए जाएं और चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित किया जाए।

दूसरी ओर चुनावी तैयारियों से जुड़े जरूरी काम भी आगे बढ़ रहे हैं। लखनऊ जिले में पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी होने की जानकारी सामने आ चुकी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 10.85 लाख मतदाता, 540 ग्राम पंचायतें और 961 गांव हैं। इससे संकेत मिलता है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक काम आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अंतिम चुनाव कार्यक्रम का इंतजार अभी बना हुआ है।

अब पंचायत चुनाव को लेकर चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा, आरक्षण प्रक्रिया और 9 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। पंचायत अधिकार संघ के प्रदर्शन और उपमुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात के बाद सरकार पर चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित करने का दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल 7 सितंबर तक मतदान की अंतिम तारीख आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है और 9 सितंबर की न्यायिक कार्यवाही के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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