
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हादसे में छह लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद घटना को लेकर प्रशासन, नगर निगम और भवन मालिक की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की। अदालत के समक्ष घटना की गंभीरता और लोगों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को रखते हुए जल्द सुनवाई की मांग की गई, जिसके बाद मामले को तत्काल सूचीबद्ध किए जाने पर सहमति बनी। अब अदालत में इस हादसे से जुड़े सुरक्षा मानकों, कथित अवैध निर्माण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका जैसे मुद्दे सामने आने की संभावना है।
सत्य निकेतन में यह हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। बताया गया कि पुरानी बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत में छात्रों के लिए पीजी या हॉस्टल जैसी व्यवस्था संचालित हो रही थी और घटना के समय अंदर कई लोगों के मौजूद होने की आशंका थी। इमारत के गिरते ही आसपास अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंचे तथा मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की गई। राहत और बचाव अभियान के दौरान मलबे को सावधानी से हटाकर लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में छह लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
प्रारंभिक जांच में इमारत की उम्र और उसकी संरचनात्मक स्थिति को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि यह भवन करीब 40 से 50 वर्ष पुराना था। हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत से संबंधित काम चलने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि बेसमेंट में चल रहे काम के कारण इमारत के किसी हिस्से की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई थी या नहीं। प्रारंभिक तौर पर पिलर या सपोर्ट कमजोर होने की आशंका जताई गई है, लेकिन हादसे का वास्तविक तकनीकी कारण विस्तृत जांच और स्ट्रक्चरल असेसमेंट के बाद ही स्पष्ट होगा। अधिकारियों की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि बेसमेंट में किस प्रकार का काम कराया जा रहा था और क्या उसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी।
नगर निगम के रिकॉर्ड से भी मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ध्वस्त इमारत का स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। बेसमेंट में किए गए निर्माण को भी कथित तौर पर अनधिकृत बताया गया है। इसके अलावा भवन की फायर सेफ्टी और फायर एनओसी से संबंधित पहलुओं की भी जांच की जा रही है। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि भवन में निर्माण संबंधी अनियमितताएं थीं या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था तो वहां छात्रों के रहने की व्यवस्था कैसे संचालित होती रही। प्रशासन अब भवन के दस्तावेज, निर्माण की अनुमति, नक्शा, फायर सेफ्टी और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक हरिराम और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत में किस प्रकार के निर्माण कार्य चल रहे थे, उनके लिए किसकी अनुमति थी और क्या किसी तरह की लापरवाही के कारण भवन की संरचना कमजोर हुई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इमारत का इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा था और वहां सुरक्षा से जुड़े आवश्यक इंतजाम मौजूद थे या नहीं। मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित दस्तावेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जा रहे हैं।
दिल्ली सरकार ने भी घटना को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि हादसे के लिए यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मजिस्ट्रियल जांच में हादसे की परिस्थितियों, भवन की स्थिति, निर्माण गतिविधियों, प्रशासनिक अनुमति और संभावित लापरवाही जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा सकती है। इस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसा केवल अचानक हुई संरचनात्मक विफलता का परिणाम था या इसके पीछे नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही भी जिम्मेदार थी।
हादसे के बाद आसपास की इमारतों को लेकर भी प्रशासन सतर्क हो गया है। नगर निगम ने आसपास के भवनों की सुरक्षा स्थिति की जांच शुरू की है। एक नजदीकी इमारत को असुरक्षित पाए जाने के बाद उसे खाली कराने और ढांचे को हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए आसपास के भवनों का निरीक्षण जरूरी है, ताकि सत्य निकेतन जैसी दूसरी घटना को रोका जा सके। नगर निगम की ओर से अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन वाली इमारतों के खिलाफ सीलिंग तथा अन्य कार्रवाई तेज करने की बात भी सामने आई है।
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के आसपास का महत्वपूर्ण छात्र क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी, हॉस्टल और किराये के कमरों में रहते हैं। इसी वजह से हादसे के बाद छात्र संगठनों और शिक्षक संगठनों ने भी भवन सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। संगठनों की मांग है कि दिल्ली के उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं, पुराने पीजी और हॉस्टल भवनों की व्यापक जांच कराई जाए। उनका कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही भवनों की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकासी और निर्माण की वैधता की जांच होनी चाहिए।
घटना के बाद राहत और बचाव अभियान के कारण सत्य निकेतन तथा आसपास के इलाकों में यातायात पर भी असर पड़ा। बचाव दलों और एंबुलेंस की आवाजाही को प्राथमिकता दी गई। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल के आसपास अनावश्यक भीड़ नहीं लगाने की अपील की, ताकि राहत कार्य में बाधा न आए। मलबा हटाने और घटनास्थल को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया भी हादसे के बाद महत्वपूर्ण रही।
अब इस पूरे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत में याचिका के जरिए हादसे की परिस्थितियों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए जाने के बाद प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल और गंभीर हो गया है। सुनवाई के दौरान भवन निर्माण नियमों, नगर निगम की निगरानी, अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई और पुराने भवनों की सुरक्षा जांच से जुड़े मुद्दों पर अदालत का ध्यान जा सकता है। छह लोगों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस भवन में लोग रह रहे थे, उसकी सुरक्षा और निर्माण स्थिति की समय रहते जांच क्यों नहीं हो सकी।
फिलहाल पुलिस की जांच, मजिस्ट्रियल जांच और नगर निगम की कार्रवाई तीनों स्तरों पर आगे बढ़ रही हैं। हादसे के वास्तविक कारण का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा। हालांकि प्रारंभिक जांच में बेसमेंट में चल रहे काम, कथित अनधिकृत निर्माण, भवन की पुरानी संरचना और सुरक्षा मानकों से जुड़े सवाल सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है। हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह भी तय हो सकता है कि भविष्य में दिल्ली के पुराने और छात्र-बहुल इलाकों में स्थित पीजी तथा हॉस्टल भवनों की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में पुराने बहुमंजिला भवनों, अनधिकृत निर्माण और भवन सुरक्षा की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।



