
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया। वहीं, राम मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए पहली बार पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच गई है। ट्रस्ट में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ मंदिर परिसर के संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, वित्तीय प्रबंधन और आने वाली परियोजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की एंट्री
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव को नए सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। इन नियुक्तियों के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक और निर्णय लेने वाले ढांचे में बदलाव की उम्मीद है। मंदिर के निर्माण के बाद अब उसके दीर्घकालिक संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर भी ट्रस्ट की जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में नए सदस्यों के शामिल होने को प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पहली बार पूर्णकालिक CEO की होगी नियुक्ति
राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में सबसे अहम बदलाव पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को माना जा रहा है। इसके लिए चयन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। चयन समिति ने तीन अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार किया है। अब ट्रस्ट को इनमें से अंतिम नाम पर फैसला करना है। CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन, विभिन्न परियोजनाओं, वित्तीय प्रबंधन और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी अधिक व्यवस्थित तरीके से तय की जा सकेगी, यह व्यवस्था मंदिर के बढ़ते स्वरूप और भविष्य में आने वाली प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चंपत राय की वापसी पर फिलहाल कोई संकेत नहीं
ट्रस्ट के प्रशासनिक बदलाव के बीच पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम में उनकी ट्रस्ट में तत्काल वापसी के कोई स्पष्ट संकेत सामने नहीं आए हैं। जुलाई 2026 में चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। ट्रस्ट ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के साथ ही ट्रस्टी के तौर पर उनकी सदस्यता भी समाप्त कर दी थी। इसके बाद पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इस स्थिति में चंपत राय की वापसी केवल किसी जांच के नतीजे पर निर्भर नहीं होगी। यदि भविष्य में उन्हें दोबारा ट्रस्ट में शामिल किया जाना है, तो इसके लिए ट्रस्ट को अलग से निर्णय लेना होगा।
जांच में राहत का मतलब पद पर वापसी नहीं
चंपत राय का नाम राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े विवाद के दौरान चर्चा में आया था। इसी घटनाक्रम के बीच उन्होंने महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। ट्रस्ट की ओर से उस समय कहा गया था कि दान में मिली वस्तुओं का रिकॉर्ड उपलब्ध है और कीमती वस्तुओं को सुरक्षित रखा गया है, ऐसे में जांच की स्थिति और ट्रस्ट के प्रशासनिक फैसले दो अलग-अलग विषय हैं। यदि किसी जांच में चंपत राय को राहत मिलती भी है, तो इससे उनकी पूर्व जिम्मेदारी स्वतः बहाल नहीं होगी। उनकी वापसी के लिए ट्रस्ट को नया फैसला लेना पड़ेगा।
मंदिर के संचालन पर रहेगा नए CEO का फोकस
पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज में अधिक स्पष्ट प्रशासनिक जिम्मेदारियां तय होने की संभावना है, मंदिर परिसर के संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, वित्तीय व्यवस्था, परियोजनाओं की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल जैसे कामों को एक पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था के तहत संचालित किया जा सकेगा, राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और व्यवस्थाओं का विस्तार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ट्रस्ट के लिए केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि मंदिर के दीर्घकालिक संचालन की योजना भी महत्वपूर्ण हो गई है।
कृष्ण मोहन की भूमिका भी होगी महत्वपूर्ण
चंपत राय के इस्तीफे के बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। अब तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति और पूर्णकालिक CEO की संभावित नियुक्ति के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महासचिव और CEO के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किस प्रकार किया जाता है, अगर CEO की नियुक्ति होती है तो प्रशासनिक कामकाज के कई हिस्सों की जिम्मेदारी सीधे उनके अधीन आ सकती है। वहीं ट्रस्ट के नीतिगत और महत्वपूर्ण फैसलों में ट्रस्टियों की भूमिका बनी रहेगी।
अगले चरण के लिए तैयार हो रहा ट्रस्ट
तीन नए सदस्यों को शामिल करने और पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया को एक साथ देखें तो साफ है कि राम मंदिर ट्रस्ट अपने प्रशासनिक ढांचे को अगले चरण के लिए तैयार कर रहा है, अब ट्रस्ट का फोकस केवल राम मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है। मंदिर के नियमित संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, वित्तीय प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है।
चंपत राय का भविष्य क्या होगा?
फिलहाल उपलब्ध घटनाक्रम के आधार पर चंपत राय की तत्काल वापसी की संभावना नजर नहीं आती। उनका इस्तीफा स्वीकार हो चुका है और उनकी ट्रस्ट सदस्यता भी समाप्त की जा चुकी है, भविष्य में यदि ट्रस्ट उनके संबंध में कोई नया निर्णय लेता है, तभी उनकी वापसी का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल ट्रस्ट की प्राथमिकता नए सदस्यों के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और पूर्णकालिक CEO के जरिए मंदिर के संचालन को अधिक व्यवस्थित एवं पेशेवर बनाना दिखाई दे रही है।



