राजनीती का सूर्यग्रहण

ध्रुवीकरण के लिए वह कुछ भी बोलते रहते हैं। कई बार बेतुका भी बोल जाते हैं। एक बार बोला था कि जो अपना है, वह अपना है। उसके सही काम तो होंगे ही, यदि वह गलत काम भी करके आएगा, फिर भी साथ दूंगा। दूसरी बार कहा कि वैश्य समाज अब इतना मजबूत हो गया है कि अगर कोई हमारी तरफ आंख उठाकर देखे तो उसकी दोनों आंखें निकालने की ताकत हमारे पास है। इसी तरह 2022 में चुनावी माहौल को गर्म करते हुए पाल समाज के सम्मेलन में कहा था कि राष्ट्रवादी भाजपा को वोट देंगे और जो आतंकवाद के साथ हैं, वे दूसरे दलों को वोट देंगे। औरंग की कब्र हटाने को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने समाजवादी पार्टी और दूसरे विपक्षी दलों पर निशाना साधा और कहा कि औरंग का इतिहास देश को तोड़ने वाला रहा है, न कि सभी धर्मों को जोड़ने वाला। देश को तोड़ने वाला था, हजारों मंदिरों व लाखों हिंदुओं को क्षति पहुंचाने का था। छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके पुत्र संभा जी महाराज ने उसके छक्के छुड़ा दिए थे। ऐसे औरंगजेब की कब्र पर जाकर अगर कुछ लोग महिमामंडन करेंगे, उसकी कब्र पर सजदे पढ़ेंगे तो ये देश के लिए सिर्फ बहुत शर्मनाक ही नहीं है, बल्कि देशद्रोह भी है। ऐसे लोगों का नामोनिशान मिटा देना चाहिए। औरंग, बाबर, उनके कई सेनापतियों व कई मौलवियों का नाम तक एक सच्चे भारतीय को नहीं लेना चाहिए, फिर भी वोट के लिए अखिलेश यादव जैसे हजारों लोग चरण वंदन करने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं। मंत्री ने संभल के नेजा मेले को भी उससे जोड़ा और विपक्ष पर हमला किया कि महमूद गाजी भी देश तोड़ने वाला था।

महमूद गजनवी, जिसने सोमनाथ मंदिर को तोड़ा था, वह उसका भांजा था तो आज प्रशासन ने उस मेले को रोकने का काम किया तो उक्त को बहुत अखार रहा है। यह सरकार ग‌द्दारों, मक्कारों, आकांताओं व देशद्रोहियों का महिमामंडन करने वाली नहीं है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर हमला करना अखिलेश का काम है, वह आक्रांताओं की कब्रों पर मेले लगवाएं। यादव ने तो जिन्ना की भी प्रशंसा की थी, जिसने देश का विभाजन किया था, फिर भी नेहरू-गांधी से मिलीभगत करके करोड़ों लोगों को यहीं छोड़ गया था, जिसमें से हजारों दोगले निकले और सैकड़ों दोमुंहे अब कहने लगे हैं कि यह देश किसी के बाप का थोड़े ही है। उन्हें समझना होगा कि वह देश जिनके बाप का था, उनके पास दो देश ले जा चुके हैं। अब जो कुछ बचा है, यह करोड़ों हिंदुओं के बाप का है। यूपी व मुंचई के सपा विधायक व सांसद अक्सर उक्त आक्रांताओं के गुण गाया करते हैं, क्योंकि उनके पास जीतने के लिए मुस्लिम वोट ही काफी हैं। बाकी को उनकी नीति, नीयत व प्रवृत्ति पर पैनी नजर रखनी होगी। देश को खंडित करने वाले ऐसे लोगों का नाम हिंदुस्तान के इतिहास और भूगोल से मिटा देना चाहिए। आज के हिंदुस्तान में जो भी मुसलमान हैं, ये वे हैं, जिनके पूर्वज हिंदू थे और उन्होंने औरंग जैसे आक्रांताओं की तलवार के डर से सलवार पहनी थी, जिसे आज भी बदलने का दम उनमें नहीं है। ऐसे लोगों को मानना चाहिए और बड़ी संख्या में मानने भी लगे हैं कि उनके पूर्वज हिंदू चे व औरंग एवं बाबर उनका पूर्वज नहीं था। देखने में आया है कि नकली लोग ही असली बनने के लिए ज्यादा उछलते हैं। खाड़ी देशों की इनके बारे में साफ सोच है कि ये दोयम दर्जे के मुसलमान हैं और इनसे दोयम दर्जे का ही व्यवहार किया जाता रहा है, पर यहां के दोयम विपक्ष के बलते खातिरदारी पा रहे हैं, वरना यहां इनकी औकात वही होती, जो बांग्लादेश, पाकिस्तान व अफगानिस्तान में हिंदुओं की है। दिल्ली आत्मघाती हमले के बाद एक बहुत मौजू बात कही कि अब अच्छे मुसलमानों, वर्माचायों और मुल्ला-मौलवी को को आगे आकर निंदा करनी चाहिए और छिपाने में मदद के बजाय एजेंसियों की मदद करके पूरे स्लीपर सेल को पकड़वाना बाहिए, जो कि नहीं करेंगे। कभी नहीं करेंगे, क्योंकि दीनी तालीम के चलते इस बात की उन्हें शिक्षा ठी नहीं मिली है इसीलिए मदरसे की पढ़ाई की सामग्री और शिथा पद्धति की जांच बहुत जरूरी है। आतंक से जुड़े शिक्षा संस्थानों की सख्त जांच हो ताकि आगे से वहां कोई आतंकी पढ़ते या पढ़ाते न पाया जाए। ज्यादा पढ़े-लिखे आतंकी गंभीर चुनौती हैं। पूर्व सांसद विनय कटियार के धन्नीपुर मस्जिद के बयान पर कहा कि वह सीनियर लीडर है, उन्हें मर्यादा में रहना चाहिए, जबकि खुद कुछ भी बोलते रहते हैं। विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने वाले कपिलदेव अग्रवाल को फिर से योगी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। राजनीति की पिच पर कपिलदेव का सिर्फ पहला अनुभव तब खराब रहा था, जब भाजपा के टिकट पर साल 2002 का चुनाव सदर विधानसभा सीट से लड़ा था। सपा के चितरंजन स्वरूप (59 हजार) से उन्हें करीब 9000 से हार का मुंह देखना पड़ा था। मंत्रालय में उन्हें दूसरी बार जगह मिली है। हार से शुरू हुई राजनीति जीत में ऐसी बदली कि फिर आज तक पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2006 में वह शहर पालिका अध्यक्ष बने। 2007 में सदर सीट से अशोक कंसल विधायक चुने गए, लेकिन कंसल 2012 में हार गए व चितरंजन जीतकर मंत्री बने। 2016 में चितरंजन का निधन हो गया तो उप चुनाव में भाजपा के टिकट पर कपिलदेव पहली बार विधायक बने थे। 2017 में जीतकर वह योगी मंत्रिमंडल में कौशल विकास राज्यमंत्री बने। 2022 में जिले से भाजपा के दो विधायक जीते, पर मंत्रालय की बाजी आखिर कपिलदेव के ही हाथ लगी और विक्रम सैनी आंकड़ों में फिट नहीं हो पाए। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाए गए कपिलदेव शहर के गांधीनगर में रहते हैं, पर मूलरूप से मेरत के किला परीक्षित गढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता रमेश चंद्र जिले में गन्ना विभाग में कार्यरत थे, जिस कारण परिवार मुजफ्फरनगर शिफ्ट हो गया और फिर यहीं के होकर रह गए। कपिल के परिवार में पानी अनु अग्रवाल, बेटा शिवम अग्रवाल, देवांश और बेटी कनिका है। मंत्री के भाई आदित्य और ललित भी यहीं रहते हैं। वह दीगर बात है कि वह दावा करते रहे हैं कि पिछले कार्यकाल में आचार संहिता की वजह से जहां पर जो काम रुक गए थे, वहीं से शुरू किए जाएंगे। सरकार की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाया जाएगा। जनता ने समर्थन देकर मंत्रालय तक पहुंचाया है। हर व्यक्ति की समस्याओं का समाधान कराने का लक्ष्य रहेगा। सीएम योगी हर साल खुद कांवड़ यात्रा पर नजर रखते हैं और पहले से की जा रही तैयारियों पर भी। देखने में आया है कि देवी-देवताओं के नाम पर दूसरे धर्म के लोग होटल या दाबा चलाकर धार्मिक आस्था पर बराबर चोट पहुंचा रहे हैं। उन्हें चाहे जितना जलील करो, पर वे सुधरने का नाम नहीं ले रहे थे, जिसके कारण अग्रवाल ने नेम प्लेट का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि होटल या दावा कोई भी चलाए, लेकिन असली नाम जरूर लिखे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया था कि अगर ऐसा कोई मामला पाया गया तो सख्त कार्रवाई होगी। पिछले साल भी सीएम ने दुकानों पर नेम प्लेट लगाने का आदेश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। मंत्री ने कहा था कि कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, क्योंकि लाखों शिवभक्त मुजफ्फरनगर से गुजरते हैं। किसी भी तरह की अव्यवस्था व आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पिछली कांवड़ यात्रा के दौरान अग्रवाल का अनोखा सेवाभाव सामने आया। एक रात मेरठ रोड स्थित एक कांवड़ सेवा शिविर पहुंचे और धके और दर्द से परेशान शिवभक्तों के पैरों में मरहम लगाया। वीडियो बन रहा था तो सोशल मीडिया पर वायरल भी होना था और हुआ भी। लोग मंत्री के सेवाभाव की सराहना भी करते नजर आए। इतना ही नहीं, मंत्री ने शिवभक्तों के साथ शिव भजनों पर खूब ठुमके भी लगाए थे। यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इससे पहले पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) ऋषिका सिंह का भी वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह महिला कांवड़ियों के पैर दबाते नजर आ रही थी। इस पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी कि सेवा का भाव अच्छा है, अगर उसके पीछे का भाव अच्छा हो। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कपिलदेव अग्रवाल ने अखिलेश यादव को गैर जिम्मेवार बताते हुए कहा था कि हर बात को राजनीतिक चश्मे से देखते हैं वह और हर बात पर बोलना जरूरी नहीं होता है। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि 15 दिनों से सड़क मरम्मत, पानी-बिजली और लाइट की व्यवस्था करने में जुटे थे। अब जब कांवड़ वात्रा चरम पर है तो सेवा करना मेरा नागरिक और धार्मिक कर्तव्य है। मेरे में भी भगवान शिव का वास है इसलिए मैं सेवा को सौभाग्य मानता हूं। चाहे भोजन कराना हो, चिकित्सा सुविधा देनी हो या धके भक्तों के पैरों में दवा लगानी हो, यह सिर्फ मंत्री का नहीं, सभी का कर्तव्य है। कपिलदेव अग्रवाल ने कहा कि भगवान शिव सबके हैं, रावण जैसे राक्षस के भी थे। ऐसे में किसी भी अधिकारी या नागरिक द्वारा सेवा करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यह भावना का विषय है, नियमों का नहीं।

…जब कैबिनेट मंत्री को भागना पड़ा

जिले में चरथावल विकास खंड के बधाई कलां गांव में आईटीआई कॉलेज के उद्घाटन का समारोह चल रहा था। कैबिनेट मंत्री राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी का आगे संबोधन चल रहा था और पीछे बच्चों की तरह प्रदेश के दो मंत्रियों में तू-तू, मैं-मैं हो रही थी। इनमें से एक थे जिले की ही पुरकाजी सीट से विधायक कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और दूसरे थे स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल। मजेदार बात यह है कि कोई इसका वीडियो बना रहा था, जो सोशल मीडिया पर रातों-रात वायरल हो गया था। कहासुनी के वायरल वीडियो से लगा कि दोनों किसी बात पर एक-दूसरे से बेहद नाराज हैं। कुछ नेताओं ने दोनों को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन फिर भी मंत्रियों की बहस जारी रही, जिसके बाद कैबिनेट मंत्री अनिल उठकर दूसरी जगह बैठने के लिए चले गए थे अग्रवाल से दूर। दूसरी ओर, जिले के जाट कॉलेज के एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मंत्री कपिलदेव को निकलने का रास्ता दिलाने के चक्कर में रालोद के प्रदेश महासचिव अशोक बालियान ने मंत्री को गाली दी थी, जिसके बाद दवाई बांटने का कार्यक्रम मौके पर ही शुरू हो गया था, क्योंकि अतिथि को गाली देने को कॉलेज के शिक्षकों ने गंभीरता से ले लिया था। सियासी पंडित मामला केवल कार हटाने को नहीं मान रहे हैं। उनका साफ कहना है कि दोनों दलों में जमीनी स्तर पर बन नहीं रही है, जिसके कारण ही गाली-गलौच की घटना हुई और एक-दूसरे की जमीन खोदने में लगे रहते हैं। ज्ञात हो कि इस बिंदु पर मुजफ्फरनगर से लेकर लखनऊ तक काफी हंगामा हुआ था और हजारों समर्थक आग उगलते रहे थे। कुछ भी हो, पर कॉलेज प्रबंधन का यही कहना था कि अतिथि का सम्मान सर्वोपरि होता है।

दंगे के आरोप में तीन घंटे रहे थे हिरासत में

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में साल 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे में भड़काऊ भाषण देने के मामले में मंत्री कपिलदेव अग्रवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान आदि आरोपी स्थानीय सांसद-विधायक अदालत में पेश हुए। सभी भाजपा नेताओं को लगभग तीन घंटे न्यायिक हिरासत में रखने के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन वेवेंद्र सिंह फौजवार ने डेट आगे बढ़ा दी। अभियोजन अधिकारी नीरज सिंह ने बताया कि 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान मंत्री कपिलदेव, पूर्व केंद्रीय मंत्री बालियान, पूर्व विधायक उमेश मलिक और महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती आदि की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने बताया कि 21 लोगों पर अगस्त 2013 में नफरत भरे भाषण देने का आरोप दूसरे पक्ष ने लगाया था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि आरोपियों ने अगस्त 2013 में नंगला मंदौड़ पंचायत की बैठक में भाषण देकर हिंसा भड़काई थी। ज्ञात हो कि 2012 में अखिलेश यादव की सरकार बनी थी, जिसके बाद सालभर में ही अगस्त और सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर और आस-पास के इलाकों में सांप्रदायिक झड़पों में 60 से अधिक लोग मारे गए थे। घायलों को अगर किनारे कर दिया जाए तो 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे। उल्लेखनीय है कि नंगला मंदौड़ पंचायत में भड़काऊ भाषण देने और निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले में राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा, पूर्व मंत्री अशोक कटारिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, साध्वी प्राची, यति नरसिंहानंद सरस्वती, श्याम पाल, बिट्टू सिखेड़ा, रवींद्र, कल्लू, योगेश, शिव कुमार, सचिन व मिंटू आदि ने वारंट कोर्ट में रिकॉल कराया। कोर्ट ने एक-एक लाख के मुचलके पर सभी नेताओं को तीन घंटे बाद रिहा कर दिया और सभी को नियमित रूप से तारीख पर उपस्थित होने का आदेश दिया। ज्ञात हो कि जानसठ थाना क्षेत्र के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को शाहनवाज और मलिकपुरा गांव निवासी सचिन और गौरव की हत्या के बाद 31 अगस्त को नंगला मंदौड़ में पंचायत हुई थी। इसके बाद जिले भर में सांप्रदायिक दंगा भड़क गया था। थाना सिखेड़ा पुलिस ने पूर्व मंत्री डॉ. संजीव बालियान सहित 14 लोगों के खिलाफ भड़काऊ भाषण, निषेधाज्ञा उल्लंघन एवं क्रिमिनल एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद एसआईटी ने विवेचना कर अलग-अलग दो चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामवीर सिंह ने बताया कि उपस्थित हुए आरोपी नेताओं के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किए थे। तत्कालीन एडीएम प्रशासन इंद्रमणि त्रिपाठी के आदेश पर निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले में निजी परिवाद भी 21 आरोपियों के खिलाफ दर्ज कराया गया था।

योगी-मोदी के फोटो के दुरुपयोग का है आरोप

21वीं सदी के शुरू में सियासत में कदम रखते ही कपिलदेव पर मुकदमे दर्ज होने शुरू हो गए थे। यह दीगर बात है कि भड़काऊ भाषण आदि को छोड़ दिया जाए तो गंभीर धाराओं में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है और न ही बहुत उल्लेखनीय संपत्ति ही बना पाए हैं। कम से कम 2022 में चुनाव के समय दाखिल किए गए हलफनामे में यही उल्लेख मिलता है। ढाई दशक के सार्वजनिक जीवन में सात मुकदमे ही दर्ज हुए हैं, लेकिन विधायक बनते ही अप्रत्याशित रूप से रफ्तार अचानक थम सी गई है। उनके भाई ललित के खिलाफ एक गंभीर केस दर्ज है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की फोटो लगाकर एक फोन का प्रचार किया था। कम ही लोगों को पता है कि कौशल विकास विभाग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव भारतीय एडवरटाइजिंग नाम की एक एजेंसी चलाते रहे हैं। इसे उनके भाई देखते हैं। उनकी एजेंसी ने राजधानी समेत कई शहरों में मोबाइल फोन की लांचिंग के होर्डिंग लगाए थे। इसमें उन्होंने उच्चतम पदस्थ लोगों के फोटो लगाए थे, जो कि दुरुपयोग है। इस तरह उनके भाई की मुश्किलें बढ़ गई थीं, क्योंकि लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज हो गया था। खुद थाने के निरीक्षक ने पीएम और सीएम की तस्वीर लगाकर लोगों को भ्रमित कर मोबाइल के प्रमोशन करने के चलते ललित समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। ज्ञात हो कि किसी सेलेब्रिटी की फोटो इस्तेमाल करने के पहले अनुमति लेना कानूनन जरूरी होता है। कपिलदेव के लिए यह मोबाइल इसलिए काफा बन गया था, क्योंकि लांचिंग करने वह खुद होटल में पहुंचे थे। कपिल के अलावा इस कार्यक्रम में तत्कालीन राज्यमंत्री नीलिमा कटियार, सुल्तानपुर के लंभुआ के विधायक देवमणि द्विवेदी और लखनऊ से बीजेपी के विधायक नीरज बोरा भी शामिल हुए थे। हालांकि वह इसके बाद भी कैसे बच गए और मंत्रि पद बरकरार रखने में कैसे सफलता मिली, यह आज तक रहस्य ही बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो जब मामले की सूचना सीएम ऑफिस को हुई तो कपिलदेव अग्रवाल ने माफीनामा भेजकर छुट्टी पा ली थी, पर केस दर्ज होने के बाद सरकार की जो किरकिरी होनी थी, वह तो हो ही चुकी थी।

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