
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीते साढ़े आठ साल से हर मंच से और हर पटल से यह दंभ भरते रहे हैं कि न मैं खाऊंगा और न खाने दूंगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी सरकार की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की होगी, लेकिन अब यह शब्द व दंभ समय के साथ बेमानी नजर आने लगा है, क्योंकि अपने ही मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों के द्वारा सरकारी खजाना लूटा जा रहा है। वे इतने ढीठ हो गए हैं कि योगी के भी सपनों व प्राथमिकता वाली योजनाओं के बजट को साफ करने से नहीं चूक रहे हैं और मुख्यमंत्री न जाने किस मजबूरी में तमाशबीन बने हुए हैं।
बाल्यावस्था से सुनते आए हैं कि चंबल के बीहड़ों में डकैत होते हैं, लेकिन 25 साल की पत्रकारिता के बाद यह बात बेधड़क कह सकता हूं कि चंबल घाटी में डकैत नहीं, बल्कि बागी होते हैं, कई सफेदपोश डकैत तो प्रदेश की विधानसभा में मिल जाएंगे। ऐसे कई आस्तीन के सांप योगी के मंत्रिमंडल में भी घुसे बैठे हैं, जिनमें से एक है बेरहम क्रूर आंखों वाला डकैत एमएसएमई मंत्री राकेश सचान। उसकी आंखों की शर्म-ओ-हया तब मर जाती है, जब वह और उसका कुनबा बेरोजगारों के पैसों पर डाका डाला डालने के लिए मैदान में उतरता है। वह इतना गिरा हुआ इंसान है कि गरीब, लाचार, कमजोर व असहाय बच्चों को मिलने वाले टूलकिट के पैसे के साथ-साथ उन्हें ट्रेनिंग के दौरान मिलने वाले भोजन की थाली भी लूटने में संकोच नहीं कर रहा है। इसको यूं भी कहा जा सकता है कि राकेश सचान सीएम के मंत्रिमंडल का वो भस्मासुर है, जो योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को चुनौती दे रहा है। एमएसएमई, खादी, रेशम, हथकरघा व निर्यात प्रोत्साहन जैसे अहम विभाग के अरबों रुपए के बजट में से एक बड़ा हिस्सा अपनी बेटी के राशि फाउंडेशन व बेटा, भतीजा, साले की कंपनियों की माध्यम से लूट रहा है। उक्त विभागों को उसने सचान फैमिली प्राइवेट लिमिटेड बनाकर रख दिया है। सैकड़ों करोड़ की लूट के तांडव का बड़ा खुलासा खुलासा ‘प्रखर पोस्ट’ अपने अगले अंक में ‘एमएसएमई का भस्मासुर’ के माध्यम से डंके की चोट पर करने जा रहा है। प्रखर पोस्ट व दृष्टांत का यह दृढ़ संकल्प है कि राकेश सचान जैसे अनेकों भ्रष्टाचारियों व भस्मासुरों को बेनकाब करता रहेगा।
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