करोड़ों के साइबर फ्रॉड का खुलासा

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगी की रकम को फर्जी बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। डीसीपी पश्चिम की साइबर सेल और रावतपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की जांच में चार म्यूल बैंक खातों के जरिए करीब 334.30 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। इन खातों से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अलग-अलग राज्यों से कुल 491 शिकायतें भी सामने आई हैं।

फर्जी आधार-पैन से खुलवाते थे खाते

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर बैंक खातों को खुलवाते थे। इन खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है। साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन खातों में पहुंचाई जाती थी। इसके बाद रकम को फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता और वहां से आगे सट्टेबाजी से जुड़े ऐप तक पहुंचाया जाता था।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कई बैंकों में ऐसे खाते खुलवाए थे। पुलिस अब इन खातों से जुड़े अन्य लोगों और उन कंपनियों की भी जांच कर रही है, जिनके जरिए रकम को आगे भेजा गया।

IIT गेट के पास से चार गिरफ्तार

पुलिस को एक्सिस बैंक की केशवपुरम शाखा के एक संदिग्ध म्यूल खाते की जानकारी NCRP से मिली थी। खाते की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने औरैया के बिधूना क्षेत्र के विपिन कुमार और शिवप्रताप को गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ और उनकी निशानदेही के आधार पर पुलिस ने बिधूना के डहरियापुर निवासी राजशेखर उर्फ अजीत और कानपुर देहात के रनियां निवासी हिमांशु गौतम को IIT गेट के पास से पकड़ा।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच की तो एक खाते में महज तीन दिन के भीतर करीब 8 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला। इसी खाते से संबंधित NCRP पर 116 शिकायतें दर्ज मिली हैं।

चार खातों से सामने आया करोड़ों का ट्रांजेक्शन

पुलिस की जांच में अलग-अलग बैंकों के खातों से बड़े पैमाने पर लेनदेन का पता चला है। एक्सिस बैंक के एक खाते में करीब 79 करोड़ रुपये, जबकि शास्त्री नगर स्थित एक्सिस बैंक के दूसरे खाते में लगभग 130 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मिला। बैंक ऑफ इंडिया के विजय नगर खाते में करीब 30 लाख रुपये और SBI के पड़ाव कंपोज शाखा से जुड़े खाते में लगभग 125 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया। इसके अलावा SBI की सरसौल शाखा का एक अन्य खाता भी पुलिस की जांच में आया है, लेकिन उसमें फिलहाल सक्रिय लेनदेन नहीं मिला। केनरा बैंक से जुड़े एक खाते की जानकारी भी पुलिस जुटा रही है।

491 शिकायतों ने खोला पूरा नेटवर्क

जांच का अहम आधार NCRP पर दर्ज शिकायतें बनीं। पुलिस के मुताबिक, तीन प्रमुख खातों से जुड़े मामलों में देश के अलग-अलग राज्यों से कुल 491 साइबर ठगी की शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों को जोड़कर पुलिस ने खातों में हुए बड़े पैमाने के लेनदेन की जांच शुरू की। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों में पैसा किन-किन साइबर अपराधों से आया और रकम को आगे किन लोगों या कंपनियों तक पहुंचाया गया।

फर्जी कंपनियां बनाकर बढ़ाया नेटवर्क

पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह ने कानपुर के विजय नगर इलाके में ऑफिस खोलकर कई फर्में तैयार की थीं। इन फर्मों के नाम पर बैंक खाते खोले गए और उनमें म्यूल खातों से रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने कम से कम पांच फर्जी फर्मों के जरिए इस नेटवर्क को आगे बढ़ाया। इन कंपनियों के खातों से रकम आगे सट्टेबाजी से जुड़े ऐप में भेजे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब इन फर्मों के दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

मास्टरमाइंड की थी म्यूल खाते खुलवाने की जिम्मेदारी

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी राजशेखर उर्फ अजीत गिरोह में म्यूल खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। वह लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनमें साइबर ठगी की रकम मंगवाने की व्यवस्था करता था।

वहीं, पुलिस ने बताया कि हिमांशु गौतम फर्जी आधार-पैन जैसे दस्तावेजों के जरिए कंपनियां और खाते खुलवाने में मदद करता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने विजय नगर में ऑफिस स्थापित करने और फर्जी कंपनियों के जरिए नेटवर्क चलाने में भूमिका निभाई।

छह बैंकों में खुलवाए गए खाते

पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपियों द्वारा SBI, Axis Bank, Small Finance Bank, Bank of India और Canara Bank समेत कई बैंकों में खाते खुलवाने की बात सामने आई है। इन खातों में साइबर ठगी की रकम आने के बाद उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था।पुलिस अब बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन को लेकर संबंधित बैंक कर्मचारियों को नोटिस देकर जानकारी मांगी जाएगी।

कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की आशंका

NCRP पर अलग-अलग राज्यों से शिकायतें मिलने के बाद पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल देश के कई हिस्सों में हुई साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए किया गया। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और कुल कितनी रकम साइबर अपराध से जुड़ी है, इसकी जांच अभी जारी है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों, फर्जी दस्तावेजों और कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि NCRP की शिकायतों के आधार पर खातों की जांच शुरू की गई थी। जांच के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि चार खातों में करीब 334.30 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है और एक खाते की जानकारी अभी जुटाई जा रही है। मामले में फरार अन्य लोगों की तलाश जारी है। गिरोह का खुलासा करने वाली पुलिस टीम के लिए डीसीपी पश्चिम ने 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की है।

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