
लखीमपुर खीरी। जिले में शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसके चलते पलिया, भीरा और बिजुआ क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कई संपर्क मार्गों पर पानी भरने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं तिकुनिया क्षेत्र के मोहाना और धौरहरा में घाघरा नदी के कटान ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
बैराज से छोड़ा गया 1.91 लाख क्यूसेक पानी
बनबसा बैराज से मंगलवार को करीब 1.91 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद शारदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। बुधवार शाम नदी का पानी खतरे के निशान से करीब 32 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। इसके बाद जिले के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा और कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए, पलिया तहसील के शाहपुर ग्राम पंचायत के मजरा ढकिया, कुंवरपुर, नरायनपुरवा और बझेड़ा समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं। कुंवरपुर खुर्द में करीब 30 से 40 घरों में पानी भरने की बात सामने आई है। कई परिवारों को घरों के अंदर पानी भरने के कारण छतों पर शरण लेनी पड़ी है।
नाव पर खाना बनाने को मजबूर परिवार
बाढ़ की गंभीर स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नरायनपुरवा गांव में एक परिवार को नाव पर ही खाना बनाते देखा गया। ग्रामीणों के सामने घर और जरूरी सामान बचाने के साथ-साथ भोजन और सुरक्षित स्थान की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि शारदा नदी के बढ़ने पर हर वर्ष गांव में पानी भर जाता है। इसके बावजूद बाढ़ से स्थायी राहत के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
दूषित पानी से बढ़ी परेशानी
जलभराव के कारण कई स्थानों पर ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की समस्या भी पैदा हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि राहत सामग्री और खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। कुछ ग्रामीण दूषित पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के गांव तक नहीं पहुंचने की भी शिकायत की। मामले की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम पुष्पक ने लेखपाल को मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में नाव की व्यवस्था कराने और ग्रामीणों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
बिजुआ ब्लॉक के कई गांव प्रभावित
बिजुआ ब्लॉक के बझेड़ा, करसौर, गुजरा, कोरियाना, सिंघिया एहतमाली व गैर एहतमाली, बेचेपुरवा, मिस्त्रीपुरवा, ढकिया कलां, रेवतीपुरवा, दौलतापुर, रड़ा देवरिया, रामपुर, जंगल नंबर सात, इमलिया फार्म और कांप एलनगंज समेत कई गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं, इन इलाकों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों के सामने आवागमन के साथ पशुओं के चारे की समस्या भी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव, राहत सामग्री, पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था कराने की मांग की है, तहसीलदार अरुण कुमार के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। संबंधित लेखपालों को प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद रहकर स्थिति की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
कई रास्तों पर पानी का तेज बहाव
पलिया से नगला जाने वाले मार्ग पर भी पानी बह रहा है। कर्बला के पास रपटा पुल और खेरना मार्ग पर पानी का बहाव देखा गया। अतरिया रेलवे क्रॉसिंग के पास मेला जाने वाले रास्ते पर भी कई स्थानों पर पानी भर गया है, पलिया-भीरा मार्ग पर बोझवा के आगे बने रपटा पुल पर भी पानी का हल्का बहाव है। कुछ रास्तों पर पानी की वजह से ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
मोहाना और घाघरा नदी के कटान से भी खतरा
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में मोहाना नदी और धौरहरा क्षेत्र में घाघरा नदी का कटान भी तेज हो गया है। निघासन क्षेत्र के जसनगर में मोहाना नदी के पानी से कई घर घिर गए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित घरों को खाली कराकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कार्रवाई की जा रही है। बाढ़ और नदी के कटान की दोहरी मार से प्रभावित ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव की व्यवस्था करने की बात कही गई है।
कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल बंद
अत्यधिक बारिश, जलभराव और आगे भी भारी वर्षा की आशंका को देखते हुए जिले में 3 सितंबर को कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण तिवारी की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, आवागमन के लिए नाव उपलब्ध कराना और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है। नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।



