
लखनऊ। राज्य कर विभाग में करीब नौ वर्षों से लंबित कैडर पुनर्गठन का मुद्दा अब समाधान की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। बुधवार को लखनऊ मंडल कार्यालय में हुई बैठक में विभाग के विभिन्न अधिकारी-कर्मचारी संघों ने पहली बार अलग-अलग मांगों के बजाय संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने पर सहमति जताई। बैठक में तय किया गया कि सभी संघ मिलकर एक साझा प्रस्ताव तैयार करेंगे। इस प्रस्ताव पर संबंधित संघों के पदाधिकारी हस्ताक्षर करेंगे और इसके बाद इसे प्रमुख सचिव राज्य कर और आयुक्त राज्य कर के सामने रखा जाएगा।
एक प्रस्ताव पर सभी संघ होंगे साथ
अब तक कैडर पुनर्गठन को लेकर अलग-अलग संघों की ओर से अपनी मांगें और सुझाव रखे जाते रहे हैं। बुधवार की बैठक में इस प्रक्रिया को एकजुट करने पर सहमति बनी। संघों का मानना है कि संयुक्त प्रस्ताव के जरिए विभाग के सामने अपनी मांगों को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से रखा जा सकेगा। इसके साथ ही संघों ने कैडर प्रबंधन को लेकर भी एक साझा प्रस्ताव तैयार करने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियां और काम का दायरा काफी बदला है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था के अनुरूप कैडर का पुनर्गठन जरूरी हो गया है।
2021 से लगातार उठता रहा मुद्दा
राज्य कर विभाग में कैडर पुनर्गठन का मामला नया नहीं है। वर्ष 2021 में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बाद वर्ष 2023 में राज्य कर अधिकारी सेवा संघ के अधिवेशन में इसे प्रमुख मांगों में शामिल किया गया। इसके बाद फरवरी 2025 में राज्य कर अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में भी कैडर पुनर्गठन को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि, अब तक इस मामले में अंतिम समाधान नहीं निकल सका था।
संयुक्त प्रस्ताव से समाधान की उम्मीद
बुधवार की बैठक में विभिन्न अधिकारी और कर्मचारी संघों के पदाधिकारी मौजूद रहे। पहली बार सभी संगठनों के बीच साझा प्रस्ताव पर सहमति बनने से करीब नौ साल पुराने विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
अब सभी संघ अपने-अपने सुझावों को शामिल करते हुए संयुक्त प्रस्ताव तैयार करेंगे। इसके बाद इसे विभाग के शीर्ष अधिकारियों के सामने रखा जाएगा। प्रस्ताव पर होने वाली आगे की कार्रवाई से यह तय होगा कि कैडर पुनर्गठन की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।



