
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में हर साल विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन छात्रावास की सुविधा उसी रफ्तार से नहीं बढ़ सकी है। विश्वविद्यालय के पुराने परिसर और जानकीपुरम स्थित द्वितीय परिसर में करीब 21 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि इनके लिए कुल 18 छात्रावास उपलब्ध हैं। इन हॉस्टलों में करीब 2,900 बेड ही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को परिसर से बाहर किराये के कमरों में रहना पड़ रहा है।
पुराने परिसर में 13, नए परिसर में पांच हॉस्टल
लखनऊ विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में कुल 13 छात्रावास हैं, जबकि जानकीपुरम स्थित नए परिसर में पांच हॉस्टल संचालित हो रहे हैं। पुराने परिसर में छात्रों के लिए आचार्य नरेंद्र देव हॉल, बलरामपुर हॉल, बैरक साहनी हॉल, हबीबुल्लाह हॉल, लाल बहादुर शास्त्री हॉल, महमूदाबाद हॉल, प्रो. रणवीर सिंह बिष्ट हॉल और सुभाष हॉस्टल हैं।
वहीं छात्राओं के लिए चंद्रशेखर आजाद हॉल, गोल्डन जुबली हॉल, कैलाश हॉल, निवेदिता हॉल और तिलक हॉल उपलब्ध हैं। इन छात्रावासों में सीमित सीट होने के कारण हर विद्यार्थी को आवासीय सुविधा मिल पाना संभव नहीं है।
3,800 से ज्यादा सीटें बढ़ीं, छात्रावास क्षमता वहीं
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विश्वविद्यालय ने स्नातक, परास्नातक और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में 3,800 से अधिक सीटों का इजाफा किया है। इसके साथ ही कई नए व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं, इसका सीधा असर विश्वविद्यालय की कुल छात्र संख्या पर पड़ा है। पहले जहां विश्वविद्यालय में करीब 16 से 17 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 21 हजार हो गई है। छात्र संख्या में करीब चार से पांच हजार की बढ़ोतरी के बावजूद हॉस्टल की उपलब्धता में उसी अनुपात में विस्तार नहीं हुआ।
जानकीपुरम परिसर में करीब 1,900 बेड
जानकीपुरम स्थित द्वितीय परिसर में भी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। यहां छात्राओं के लिए डॉ. बीआर आंबेडकर हॉल, लावण्या हॉल और गंगा हॉल बनाए गए हैं। छात्रों के लिए कौटिल्य हॉल और एचजे भाषा हॉल हैं।
इन सभी छात्रावासों को मिलाकर करीब 1,900 बेड उपलब्ध बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद नए सत्र में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले आवासीय क्षमता काफी कम है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर के आसपास निजी कमरों और पीजी में रहने का विकल्प चुनना पड़ रहा है।
छात्राओं के लिए 350 बेड का नया हॉस्टल प्रस्तावित
हॉस्टल की कमी को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्राओं के लिए नई सुविधा विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। करीब 350 छात्राओं की क्षमता वाले नए छात्रावास का प्रस्ताव भेजा गया है।
कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा के मुताबिक, विश्वविद्यालय की ओर से दो नए छात्रावासों के प्रस्ताव भेजे गए थे। इनमें से एक को मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, स्वीकृत हॉस्टल का निर्माण पुराने परिसर में होगा या जानकीपुरम परिसर में, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
1999 के बाद पुराने परिसर में नहीं बना नया हॉस्टल
पुराने परिसर में छात्रावासों के विस्तार की रफ्तार काफी धीमी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां आखिरी बार वर्ष 1999 में मैनेजमेंट गर्ल्स हॉल के रूप में छात्रावास का निर्माण हुआ था। बाद में वर्ष 2003 में इसे तिलक हॉल में परिवर्तित कर दिया गया।
इसके बाद पुराने परिसर में नए छात्रावास के निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं इस दौरान विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रमों और विद्यार्थियों की संख्या में लगातार इजाफा होता रहा।
बढ़ती छात्र संख्या के साथ चुनौती भी बढ़ी
लखनऊ विश्वविद्यालय में नए पाठ्यक्रमों और बढ़ी हुई सीटों के कारण आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे में हॉस्टल की सीमित क्षमता विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
वर्तमान स्थिति में करीब 21 हजार विद्यार्थियों के मुकाबले लगभग 2,900 बेड उपलब्ध हैं। यानी विश्वविद्यालय की कुल छात्र संख्या की तुलना में आवासीय सुविधा सीमित विद्यार्थियों तक ही पहुंच पा रही है। अब नए हॉस्टल के निर्माण और मौजूदा छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने पर विश्वविद्यालय को तेजी से काम करने की जरूरत होगी।



