
लखनऊ। दिल की धड़कन सामान्य से कम हो जाने वाले मरीजों के इलाज के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने आधुनिक पेसमेकर तकनीक की सुविधा शुरू की है। कार्डियोलॉजी विभाग में अब जरूरत के मुताबिक मरीजों को लीडलेस पेसमेकर लगाया जा सकेगा। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें सामान्य पेसमेकर की तरह शरीर के अंदर लंबी तार डालने और त्वचा के नीचे बैटरी के लिए अलग जगह बनाने की जरूरत नहीं होती।
नस के रास्ते हृदय तक पहुंचता है छोटा डिवाइस
लीडलेस पेसमेकर एक छोटे कैप्सूल जैसे उपकरण के रूप में होता है। डॉक्टर इसे कैथेटर की मदद से पैर की नस के जरिए हृदय तक पहुंचाते हैं। इसके बाद इसे हृदय के दाएं निलय में निर्धारित स्थान पर लगाया जाता है। यह डिवाइस हृदय की धड़कन पर लगातार नजर रखता है। जब धड़कन जरूरत से ज्यादा धीमी होती है, तो यह आवश्यक विद्युत संकेत देकर उसे सामान्य गति बनाए रखने में मदद करता है।
पारंपरिक पेसमेकर से कैसे अलग?
सामान्य पेसमेकर में छाती की त्वचा के नीचे एक जनरेटर लगाया जाता है और उससे जुड़ी तारें हृदय तक पहुंचाई जाती हैं। लीडलेस पेसमेकर में इस पूरी व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ती।
इस वजह से पेसमेकर की तार से जुड़ी कुछ समस्याओं से बचने का विकल्प मिलता है। संक्रमण या तार के खराब होने जैसी जटिलताओं का जोखिम भी कुछ मामलों में कम हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मरीज के लिए लीडलेस पेसमेकर ही उपयुक्त होगा।
हर मरीज के लिए नहीं है यह तकनीक
लीडलेस पेसमेकर लगाने का निर्णय डॉक्टर मरीज की बीमारी और उसकी हृदय संबंधी जरूरतों को देखकर लेते हैं। मरीज की धड़कन की समस्या, हृदय की स्थिति और किस प्रकार की पेसिंग की जरूरत है, इन सभी पहलुओं की जांच के बाद तकनीक का चयन किया जाता है।
इलाज के बाद अस्पताल में कम समय रुकने की संभावना
इस प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति सामान्य रहने पर अस्पताल में ज्यादा दिनों तक भर्ती रखने की जरूरत नहीं पड़ सकती। कुछ मामलों में करीब एक दिन के भीतर मरीज को घर भेजा जा सकता है। हालांकि, अस्पताल में रहने की अवधि प्रत्येक मरीज की रिकवरी और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करती है। लीडलेस पेसमेकर में इस्तेमाल होने वाली बैटरी की क्षमता आम तौर पर कई वर्षों तक चलती है। अलग-अलग डिवाइस में इसकी अवधि अलग हो सकती है और मरीज के इस्तेमाल के अनुसार भी इसमें अंतर आता है।
KGMU में मरीजों को मिलेगा नया विकल्प
लीडलेस पेसमेकर की सुविधा शुरू होने से KGMU में दिल की धड़कन से जुड़ी समस्या वाले मरीजों के लिए उपचार का एक और विकल्प उपलब्ध हो गया है। खास तौर पर उन मरीजों में, जिनके लिए पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में लीडलेस तकनीक चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त मानी जाती है, इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस सुविधा का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के जरिए पेसमेकर उपचार को मरीजों तक पहुंचाना है। इलाज की अंतिम प्रक्रिया और तकनीक का चयन संबंधित विशेषज्ञ मरीज की जांच के बाद ही करते हैं।



