PoK में फिर उठी ‘आज़ादी’ की मांग

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जून से चल रहा आंदोलन 100 दिन से ज्यादा पुराना हो चुका है और अब भी थमा नहीं है। ताजा प्रदर्शन LoC के बेहद करीब मांढोल गांव में हुआ। अवामी एक्शन कमेटी ने LoC से करीब सात किलोमीटर दूर इस गांव के मैदान में पूरे दिन का प्रदर्शन किया, जिसमें लगभग 25 हजार लोग जुटे और LoC खत्म करने तथा पुंछ व मेंढर की ओर रास्ते खोलने की मांग उठाई। यह आंदोलन का 110वां दिन था।

मंच से क्या कहा गया

नेताओं ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने राशन की आपूर्ति रोकी, स्थानीय लोगों का शोषण किया और फौजी दबदबे से इलाके को काबू में रखा। उनका दावा है कि हालिया अशांति में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। प्रदर्शनकारियों ने PoK के चुनावों की वैधता पर सवाल उठाए, क्षेत्रीय सरकार को पाकिस्तान की कठपुतली बताया और आजादी की मांग दोहराई। ये आंकड़े और आरोप प्रदर्शनकारियों के पक्ष के हैं।

शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ नारे

जून के मध्य में हुए प्रदर्शनों में भी यही गुस्सा दिखा था। तब प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल असीम मुनीर, PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौड़ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन्हें आतंकी बताया था।

कैसे भड़का आंदोलन

जून 2026 की शुरुआत के प्रदर्शनों में तेजी 7 जून को अजाद कश्मीर की सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आई, जिसमें कहा गया कि शरणार्थी सीटें संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं और संविधान संशोधन के बिना खत्म नहीं हो सकतीं। इसके बाद रावलकोट, मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली और बाग समेत कई इलाकों में प्रदर्शन फैल गए। सरकार ने 5 जून 2026 को जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित कर दिया।

हिंसा और मौतों के आंकड़े

मौतों के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे हैं। जुलाई के अंत में रिपोर्ट आई कि रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक JAAC के लंबे मार्च के बाद हुई झड़पों में कम से कम 37 लोग मारे गए। पाकिस्तान ने आम नागरिकों की मौत से इनकार किया और प्रदर्शनकारियों से बातचीत से भी मना कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक जून के आखिर तक मृतकों की संख्या 150 पार होने का दावा किया गया था। सरकार के स्तर पर इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं है, इसलिए इन्हें दावा बताकर ही लिखें।

चुनाव पर टकराव

आंदोलन का असर चुनाव पर भी पड़ा। आजाद कश्मीर विधानसभा चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त 2026 के बीच कराए गए। PTI ने अशांति का हवाला देकर चुनाव का बहिष्कार किया। JAAC ने लोगों से मतदान केंद्रों से दूर रहने की अपील की और वोटिंग को ‘बंदूक की नोक पर’ कराया जा रहा फर्जीवाड़ा बताया। नतीजों में PML(N) के इफ्तिखार गिलानी नए प्रधानमंत्री चुने गए। मांढोल की रैली में प्रदर्शनकारियों ने इसी चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए।

सरकार का रुख

शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने माना कि सरकार पहले JAAC से मांगों पर बातचीत कर चुकी है, लेकिन आंदोलन पर ‘भारत जैसा हमला’ करने का आरोप लगाया और ताजा दौर में नागरिकों की मौत की खबरों से इनकार किया।

मांढोल की भीड़ बताती है कि आंदोलन की मांगें अब शरणार्थी सीटों और आर्थिक राहत से आगे बढ़कर LoC और आजादी तक पहुंच गई हैं। चुनाव खत्म हो चुके हैं, फिर भी सड़कों पर गुस्सा कम नहीं हुआ है। मांढोल प्रदर्शन पर पाकिस्तान सरकार की ताजा प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई

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