
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती एसी स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने 9 यात्रियों की जान ले ली। हादसा बुधवार देर रात ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में दयानतपुर गांव के पास हुआ। दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही बस में करीब 35 यात्री सवार थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। 26 यात्री किसी तरह बस से बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि नौ लोग अंदर फंस गए।
रात करीब 11 बजे बस में लगी आग
जानकारी के मुताबिक, बस यमुना एक्सप्रेसवे पर करीब 33वें किलोमीटर के पास पहुंची थी। इसी दौरान यात्रियों को चालक केबिन की तरफ से जलने की गंध महसूस हुई। FIR में दर्ज यात्री के बयान के मुताबिक, कुछ यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को इसकी जानकारी भी दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद बस को तत्काल नहीं रोका गया। कुछ देर बाद चालक के पास से आग की लपटें निकलने लगीं और देखते ही देखते आग ने पूरे बस के अंदरूनी हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। ये आरोप FIR में दर्ज हैं और इनकी जांच पुलिस कर रही है।
कुछ ही मिनट में फैली आग
हादसे में बचने वाले यात्रियों के मुताबिक आग बहुत तेजी से आगे से पीछे की तरफ फैली। बस में धुआं भरने के बाद यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। कुछ यात्रियों ने बस से कूदकर अपनी जान बचाई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि आग फैलने के बाद कुछ ही मिनटों में बस के अंदर हालात बेहद गंभीर हो गए थे।
पुलिस और दमकलकर्मियों के पहुंचने तक बस का बड़ा हिस्सा जल चुका था। आग पर काबू पाने में भी काफी समय लगा, क्योंकि बस के ईंधन टैंक तक आग पहुंच गई थी। दमकल अधिकारियों के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद जेवर टोल प्लाजा और जेवर फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गई थीं।
9 यात्रियों की मौत, कई लोग घायल
इस हादसे में कुल नौ यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। आग इतनी भीषण थी कि कई शव बुरी तरह झुलस गए, जिससे उनकी पहचान करने में मुश्किल आई। पुलिस के अनुसार, गुरुवार तक छह मृतकों की पहचान हो चुकी थी। मृतकों में तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल बताए गए हैं। बाकी मृतकों की पहचान के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रक्रिया जारी रही।
एक महिला यात्री को हादसे में चोटें आईं और उसे अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं उसके साथ यात्रा कर रहे पति की इस हादसे में मौत हो गई। घटना के बाद कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे रहे। महोबा के एक परिवार ने भी अपने दो सदस्यों के बस में सवार होने के बाद संपर्क नहीं होने की जानकारी दी।
ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने बस के ड्राइवरों और कंडक्टर को हिरासत में लेकर कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार बस में दो ड्राइवर और एक कंडक्टर मौजूद थे। हादसे के बाद वे बस से बाहर निकल गए थे। मामले में यात्रियों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि जलने की गंध की सूचना मिलने के बावजूद बस को समय पर नहीं रोका गया। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
FIR में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आग लगने के समय बस में सुरक्षा इंतजाम किस स्थिति में थे और यात्रियों को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते उपलब्ध थे या नहीं।
इमरजेंसी एग्जिट को लेकर भी सवाल
जांच के दौरान बस में बने आपातकालीन निकास को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दमकल टीम को बस के दो इमरजेंसी एग्जिट बंद मिले। इसके चलते राहत एवं बचाव दल को शव निकालने के लिए बस के एक हिस्से को काटना पड़ा। हालांकि, इन सुरक्षा व्यवस्थाओं और उनकी स्थिति की विस्तृत जांच अभी जारी है।
आग लगने की वजह पर अलग-अलग बातें
बस में आग लगने की वास्तविक वजह अभी जांच का विषय है। परिवहन विभाग की शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। वहीं पुलिस अधिकारियों ने एसी सिस्टम में स्पार्क या ब्लास्ट के बाद इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगने की संभावना की भी बात कही है। अंतिम कारण तकनीकी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
बस के खिलाफ पहले से कई चालान
हादसे के बाद बस के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच शुरू हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, बस के खिलाफ जनवरी 2024 से अगस्त 2026 के बीच कई चालान दर्ज हुए थे। इनमें ओवरस्पीडिंग, परमिट और अन्य यातायात नियमों से जुड़े उल्लंघन शामिल बताए गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार बस पर 61 चालान जारी किए गए थे, जिनमें कुछ का भुगतान लंबित था। परिवहन विभाग अब बस की फिटनेस, परमिट और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रहा है।
बस की फिटनेस को लेकर परिवहन विभाग का बयान
परिवहन विभाग की शुरुआती जांच में अधिकारियों ने कहा कि बस के जरूरी कागजात उपलब्ध थे। विभाग ने यह भी बताया कि जली हुई बस की जांच की गई है और किसी अतिरिक्त संशोधन की बात शुरुआती जांच में सामने नहीं आई। हालांकि, दो इमरजेंसी दरवाजों से यात्री बाहर क्यों नहीं निकल सके, यह भी जांच का हिस्सा है।
मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये की मदद
हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके अलावा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से भी मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इस तरह प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल 4 लाख रुपये की सहायता मिलने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को जरूरी मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन ने हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेज किया तथा बचे हुए यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरी बस की व्यवस्था की।
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस सुरक्षा फिर सवालों में
ग्रेटर नोएडा की यह घटना लंबी दूरी की स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे हादसों में यात्रियों के लिए इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशमन उपकरण, वायरिंग, एसी सिस्टम और बस की फिटनेस अहम सुरक्षा बिंदु होते हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे में भी पुलिस और परिवहन विभाग इन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। फिलहाल प्राथमिक जांच, FIR और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। आग की अंतिम वजह और हादसे के लिए जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।



