
नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती में हाल के दिनों में सामने आए डोपिंग और व्हेयरअबाउट्स नियमों के उल्लंघन के मामलों ने Wrestling Federation of India (WFI) की चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद WFI ने पहलवानों और उनके सपोर्ट स्टाफ के लिए एंटी-डोपिंग को लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। फेडरेशन ने साफ किया है कि खिलाड़ी के शरीर में जाने वाली दवा, सप्लीमेंट या किसी अन्य पदार्थ की जिम्मेदारी खुद खिलाड़ी की होगी।
एशियन गेम्स से जुड़े दो मामले
डोपिंग के हालिया मामलों का सीधा असर आगामी एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय कुश्ती टीम पर पड़ा है। 86 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के मुकुल दहिया और 130 किलोग्राम ग्रीको-रोमन वर्ग के दीपांशु डोपिंग मामलों के चलते टीम से बाहर हो गए हैं। इन दोनों पहलवानों के बाहर होने का मतलब है कि संबंधित दोनों भार वर्गों में एशियन गेम्स में भारत का कोई पहलवान हिस्सा नहीं ले सकेगा। WFI की ओर से रिप्लेसमेंट की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई, लेकिन डोपिंग मामले में खिलाड़ी की जगह दूसरे पहलवान को शामिल करने की अनुमति नहीं मिली।
मुकुल दहिया का मामला क्या है?
मुकुल दहिया ने 2026 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। एशियन गेम्स चयन ट्रायल के दौरान 31 मई को लखनऊ के SAI सेंटर में उनका सैंपल लिया गया था। इसके बाद प्रतिबंधित पदार्थ मेफेंटरमाइन के लिए पॉजिटिव पाए जाने पर NADA ने उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित किया। WFI से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, मुकुल ने अपने स्पष्टीकरण में एक साथी पहलवान की सलाह पर इंजेक्शन लेने की बात कही। फेडरेशन ने इसी संदर्भ में खिलाड़ियों को चेताया है कि किसी दूसरे व्यक्ति की सलाह पर दवा या इंजेक्शन लेना उन्हें एंटी-डोपिंग नियमों के तहत जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।
दीपांशु पर आठ साल का प्रतिबंध
130 किलोग्राम ग्रीको-रोमन पहलवान दीपांशु का मामला भी गंभीर है। WFI सूत्रों के अनुसार, उन्हें स्टैनोजोलोल के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद आठ साल का प्रतिबंध मिला है। इसे उनका दूसरा एंटी-डोपिंग उल्लंघन बताया गया है, इससे पहले भी वह इसी पदार्थ से जुड़े मामले में तीन साल का प्रतिबंध झेल चुके थे। वापसी के बाद उन्होंने एशियन गेम्स चयन ट्रायल में जीत दर्ज कर भारतीय टीम में जगह बनाई थी। लेकिन नए मामले के बाद वह एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
अंडर-23 पहलवान भी जांच के दायरे में
डोपिंग की समस्या केवल सीनियर पहलवानों तक सीमित नहीं है। जुलाई में रोहतक में हुई अंडर-23 राष्ट्रीय चैंपियनशिप के पदक विजेता निखिल और रोहित कुमार के सैंपल भी प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए। NADA ने दोनों को अस्थायी रूप से निलंबित किया है। इस कार्रवाई के चलते दोनों पहलवान अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप की भारतीय टीम के चयन ट्रायल में हिस्सा नहीं ले पाए। इसके अलावा 2024 के अंडर-23 विश्व चैंपियन चिराग छिक्कारा पर व्हेयरअबाउट्स नियमों से जुड़ी कार्रवाई हुई है। उन्हें तीन व्हेयरअबाउट्स विफलताओं के नोटिस के बाद दो साल के प्रतिबंध का सामना करना पड़ा है।
व्हेयरअबाउट्स नियम क्या है?
एंटी-डोपिंग सिस्टम में कुछ खिलाड़ियों को टेस्टिंग पूल में शामिल किया जाता है। ऐसे खिलाड़ियों को अपनी रहने की जगह, ट्रेनिंग लोकेशन, यात्रा और प्रतियोगिता कार्यक्रम जैसी जानकारी निर्धारित तरीके से अपडेट करनी होती है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका डोप टेस्ट किया जा सके। WFI ने पहलवानों को निर्देश दिया है कि वे अपने NADA/ADAMS अकाउंट को नियमित रूप से चेक करें और जानकारी में बदलाव होने पर उसे समय पर अपडेट करें। Registered Testing Pool में शामिल खिलाड़ियों को लागू 60 मिनट की टेस्टिंग आवश्यकता का भी पालन करना होगा।
दवा और सप्लीमेंट को लेकर भी चेतावनी
WFI ने पहलवानों को दवाइयों, सप्लीमेंट और न्यूट्रिशनल प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल में विशेष सावधानी बरतने को कहा है। किसी भी दवा या पदार्थ का सेवन करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह एंटी-डोपिंग नियमों के तहत प्रतिबंधित तो नहीं है। फेडरेशन ने खिलाड़ियों को यह भी सलाह दी है कि वे डॉक्टर को बताएं कि वे एंटी-डोपिंग नियमों के अधीन हैं। जरूरत पड़ने पर Therapeutic Use Exemption यानी TUE से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी लेने को भी कहा गया है। सबसे अहम निर्देश यह है कि पहलवान केवल किसी साथी खिलाड़ी, कोच, ट्रेनर या जिम स्टाफ की सलाह पर दवा या सप्लीमेंट न लें। पहले उसके एंटी-डोपिंग स्टेटस की उचित जांच करना जरूरी होगा।
WFI अब जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा
फेडरेशन ने केवल चेतावनी जारी करने तक सीमित रहने के बजाय एंटी-डोपिंग जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। इसमें खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए विशेष सेशन, ADAMS और व्हेयरअबाउट्स जानकारी भरने की ट्रेनिंग, प्रतिबंधित पदार्थों और दवाओं से जुड़ी जानकारी तथा NADA विशेषज्ञों के साथ बातचीत शामिल होगी। राष्ट्रीय कैंप, अकादमी और प्रतियोगिताओं के दौरान भी खिलाड़ियों को समय-समय पर एंटी-डोपिंग नियमों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
क्यों अहम है WFI की एडवाइजरी?
हाल के मामलों में सीनियर और अंडर-23 दोनों स्तर के पहलवानों के नाम सामने आने के बाद यह मुद्दा भारतीय कुश्ती के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। एशियन गेम्स के दो भार वर्गों में भारतीय पहलवानों का नहीं उतर पाना इसका तत्काल प्रभाव है। WFI का जोर इस बात पर है कि पहलवानों को एंटी-डोपिंग नियमों की पूरी जानकारी हो और किसी भी दवा या सप्लीमेंट के इस्तेमाल से पहले उसकी जांच की जाए। फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों की जानकारी न होना या किसी दूसरे व्यक्ति की सलाह पर पदार्थ लेना खिलाड़ी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को खत्म नहीं करता।
फिलहाल WFI की नई एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को डोपिंग नियमों के प्रति अधिक जागरूक करना और भारतीय कुश्ती में नियमों के अनुपालन को मजबूत करना है।



