अखिलेश के सामने तीसरी सीट की चुनौती

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर सीटों का गणित चर्चा में आ गया है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। यूपी की 10 सीटों में फिलहाल आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास है।

एक सीट के लिए 37 वोटों का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय 397 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित के अनुसार एक सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वाले मतों की जरूरत होगी। सपा के पास 101 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर पार्टी दो सीटों के लिए जरूरी 74 मत जुटाने की स्थिति में है। तीसरी सीट के लिए उसे अपने मौजूदा समर्थन से करीब 16-17 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत पड़ सकती है।

वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास सहयोगी दलों को मिलाकर पर्याप्त संख्या बल है। रिपोर्टों के अनुसार एनडीए के पास 294 विधायक हैं। आठ सीटों के लिए 296 मतों की जरूरत होगी, इसलिए भाजपा गठबंधन को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

सपा के तीसरे प्रत्याशी पर नजर

सपा की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नामों की चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी तीसरे प्रत्याशी को भी मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। इस सीट के लिए सपा को अपने मौजूदा विधायकों के अलावा अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा, राज्यसभा चुनाव में मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के तहत होता है। ऐसे में उम्मीदवारों की संख्या और विधायकों के समर्थन का अंतिम समीकरण चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा-सपा के बीच नंबर गेम

मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा और सपा के बीच राज्यसभा सीटों को लेकर नंबर गेम अहम हो गया है। 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग और एक विधायक के मतदान से गैरहाजिर रहने का उदाहरण भी सामने आया था। हालांकि इस बार विधायकों का अंतिम मतदान व्यवहार अभी तय नहीं है। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना होगी।

इस चुनाव में मौजूदा संख्या बल के आधार पर सपा के लिए दो सीटों का गणित मजबूत दिख रहा है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा। अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों के नामांकन और मतदान के बाद ही साफ होगी।

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