
अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में बुधवार, 23 सितंबर को जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जेल में बंद आठों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। करीब 40 हजार पन्नों की इस चार्जशीट के दाखिल होने के बाद कोर्ट परिसर में गहमागहमी बढ़ गई। अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई।
अधिवक्ताओं का कहना है कि इस मामले में उनकी ओर से पहले दी गई आपत्तियों पर सुनवाई होनी चाहिए थी। इसी मुद्दे को लेकर कोर्ट परिसर में काफी देर तक माहौल गर्म रहा। वहीं पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र में आठों आरोपियों की कथित भूमिका और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का विवरण शामिल किया गया है, चार्जशीट में जेल में बंद टिन्नू यादव, करुणेश, मनीष, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, रमाशंकर, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा समेत आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपों का उल्लेख किया गया है। अब अदालत में इस चार्जशीट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।
105 घटनाओं की जांच का भी जिक्र
चार्जशीट दाखिल होने से पहले एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में चढ़ावे की रकम से जुड़ी 105 संदिग्ध चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। शुरुआती जांच में 70 घटनाओं का उल्लेख था, लेकिन विस्तृत सीसीटीवी विश्लेषण के बाद संख्या बढ़कर 105 बताई गई। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह सामने आना बाकी है कि जांच एजेंसी ने इन घटनाओं में कितनी रकम की कथित चोरी मानी है और अलग-अलग आरोपियों की भूमिका को किस आधार पर तय किया है। अदालत में पेश किए गए दस्तावेज और साक्ष्य आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण होंगे।
ट्रस्ट पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठी
मामले में कुछ अधिवक्ताओं की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पहले ही की जा चुकी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस बात पर भी नजर है कि जांच एजेंसी ने ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की भूमिका को लेकर क्या तथ्य दर्ज किए हैं।
इस मामले में आज की सबसे बड़ी कार्रवाई आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होना है। अब अदालत चार्जशीट और उसमें पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।



