
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके PDA राजनीतिक फॉर्मूले पर निशाना साधते हुए दावा किया कि यह रणनीति चुनाव में सफल नहीं होगी और प्रदेश में एक बार फिर NDA की सरकार बनेगी।
विनोद तावड़े का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। तावड़े को हाल ही में पार्टी का उत्तर प्रदेश प्रभारी बनाया गया है। उनकी जिम्मेदारी संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ चुनावी तैयारियों में समन्वय स्थापित करने की भी है। ऐसे में उनके बयान को भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव लंबे समय से PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक राजनीतिक मंच पर जोड़कर समाजवादी पार्टी का आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। सपा की ओर से PDA को आगामी विधानसभा चुनाव की प्रमुख रणनीति के तौर पर पेश किया जा रहा है। पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और PDA के समर्थन से सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
हाल के महीनों में अखिलेश यादव ने PDA के सामाजिक दायरे को विस्तार देने की कोशिश भी की है। अगस्त में उन्होंने ब्राह्मण समाज को जोड़ते हुए PDA में ‘P’ को ‘पंडित’ से जोड़ने की बात कही थी। इसके बाद PDA की राजनीतिक परिभाषा और इसके जरिए अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधने की सपा की रणनीति को लेकर चर्चा और तेज हुई।
भाजपा की ओर से अब PDA की इसी रणनीति को निशाने पर लिया जा रहा है। विनोद तावड़े ने दावा किया कि अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला चुनाव में कामयाब नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाला NDA गठबंधन एक बार फिर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगा।
दूसरी ओर, भाजपा ने भी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। उत्तर प्रदेश के अपने हालिया दौरे के दौरान विनोद तावड़े ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा की। उन्होंने संगठन को मजबूत करने, जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और चुनावी तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। पार्टी कार्यकर्ताओं को अनावश्यक प्रचार से बचने और संगठनात्मक काम पर ज्यादा जोर देने की सलाह भी दी गई।
भाजपा की रणनीति में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना अहम माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संगठन की पकड़ को भी मजबूत किया जाए। वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए PDA के जरिए पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और अन्य सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं और राज्य की राजनीति का राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक असर पड़ता है। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां सत्ता में वापसी को लेकर संगठनात्मक अभियान मजबूत कर रही है, वहीं सपा अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को और व्यापक बनाने की कोशिश में जुटी है।
आगामी चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सामाजिक समीकरणों और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर टकराव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। तावड़े का PDA पर हमला इसी सियासी मुकाबले की एक कड़ी माना जा रहा है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार को सामाजिक न्याय, आरक्षण और मतदाता सूची समेत कई मुद्दों पर लगातार घेर रही है।
2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन दोनों दलों की तैयारियों और नेताओं के बयानों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक मुकाबले की जमीन तैयार होने लगी है। भाजपा NDA के जरिए सत्ता में दोबारा लौटने का दावा कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी PDA के सामाजिक समीकरण के सहारे चुनावी चुनौती पेश करने की तैयारी में है। आने वाले समय में दोनों दलों के बीच बयानबाजी के साथ-साथ संगठनात्मक और जमीनी गतिविधियां भी और तेज होने की संभावना है।



