
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार को प्रशासनिक कार्रवाई के साथ नए मोड़ पर पहुंच गया। जिला अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए थे। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी और आरएएफ के जवान तैनात किए गए, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
मस्जिद को लेकर विवाद जमीन के स्वामित्व और कथित अतिक्रमण से जुड़ा था। जुलाई 2026 में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए परिसर खाली करने और ढांचे को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी। मस्जिद कमेटी ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी थी।
4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। अदालत के फैसले में संबंधित जमीन को सरकारी भूमि माना गया। जिला अदालत के फैसले के अगले ही दिन शनिवार को प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
सुबह वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद भारी सुरक्षा के बीच बुलडोजर की मदद से मस्जिद के ढांचे को गिराया गया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि यह कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, कलेक्ट्रेट की जमीन पर मस्जिद का निर्माण अवैध पाए जाने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया था। जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद उसी आदेश के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास पुलिस बल के साथ पीएसी और आरएएफ की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गईं। परिसर के सभी प्रवेश द्वार बंद रखे गए और प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। अधिकारियों का कहना था कि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
इसी बीच मस्जिद विवाद को लेकर कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके कैराना स्थित आवास के बाहर रात से ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। उनका दावा है कि उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और अपने क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को उनके सामने रखना चाहती थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित सांसद का अधिकारियों से मिलने जाना अब अपराध माना जाएगा।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित मस्जिद काफी पुरानी है और इसका अस्तित्व 1911 से पहले का बताया जाता है। मसूद ने आरोप लगाया कि मामले की कानूनी प्रक्रिया में वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को आगे अदालत में चुनौती दी जाएगी और कानूनी स्तर पर लड़ाई जारी रखी जाएगी।
मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया है। शिकायत में परिसर के कथित तौर पर अन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात भी कही गई थी। प्रशासन की ओर से सरकारी कार्यालय की सुरक्षा और महत्वपूर्ण तथा गोपनीय कार्यों को देखते हुए इस निर्माण और कथित अतिक्रमण पर आपत्ति जताई गई थी।
वहीं मस्जिद पक्ष ने प्रशासन के आरोपों और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। मस्जिद कमेटी की ओर से अदालत में सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी गई थी, लेकिन जिला अदालत ने 4 सितंबर को अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार को ढांचे को हटाने की कार्रवाई की।
मामले को लेकर सहारनपुर में तनाव की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
फिलहाल मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में है। एक ओर प्रशासन इसे अदालत के आदेश के अनुपालन में की गई कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्षी नेताओं और मस्जिद पक्ष की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया और जमीन से जुड़े दावों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित चुनौती पर अब सभी की नजर है।



