
लखनऊ। राजधानी में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। नगर निगम के तहसीलदार की जांच में सात लेखपालों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में सरकारी भूमि पर कब्जे के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायतें थीं। इन मामलों में संबंधित कब्जेदारों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन नोटिस की समयसीमा समाप्त होने के बाद भी कई जगह आगे की कार्रवाई नहीं हुई। इससे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बने रहने की स्थिति सामने आई।
IGRS शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
मामले की जांच आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर आगे बढ़ी। जमीन से जुड़े मामलों की जांच और पैमाइश के दौरान कुछ स्थानों पर सरकारी संपत्ति प्रभावित होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में तैनात सात लेखपालों की भूमिका को लेकर भी पड़ताल शुरू की गई, जांच में यह आशंका जताई गई कि कुछ मामलों में राजस्व कर्मचारियों की कथित लापरवाही या मिलीभगत के कारण अवैध कब्जे करने वालों को लाभ मिला। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
2 सितंबर को अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट
नगर निगम के तहसीलदार ने मामले की जानकारी देते हुए 2 सितंबर को वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा। पत्र के माध्यम से सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है, तहसीलदार अरविन्द पाण्डेय की ओर से नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। संबंधित मामलों में कब्जेदारों को नोटिस देने की प्रक्रिया भी की गई है।
कब्जेदारों के साथ जिम्मेदार कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद यदि अवैध कब्जा नहीं हटाया गया तो कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सरकारी जमीन पर कब्जा कराने या उसे संरक्षण देने में किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, अधिकारियों ने राजस्व कर्मचारियों को सरकारी भूमि की निगरानी और अतिक्रमण के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले में जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।



