23 साल में बदली मतदाता तस्वीर, मुस्लिम वोटरों की बढ़ोतरी

सोनभद्र। दुद्धी तहसील क्षेत्र का बघाड़ू गांव इन दिनों मतदाता सूची और जमीन से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद सामने आए 2026 के मतदाता आंकड़ों की वर्ष 2003 की सूची से तुलना करने पर गांव में मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव सामने आया है। आंकड़ों के मुताबिक, 23 वर्षों में बघाड़ू में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 430 से बढ़कर 902 हो गई, जबकि हिंदू मतदाताओं की संख्या 2,864 से बढ़कर 3,621 हुई।

2003 से 2026 तक कितना बदला आंकड़ा

वर्ष 2003 में बघाड़ू के तीन बूथों पर कुल 3,292 मतदाता दर्ज थे। इनमें 430 मुस्लिम और 2,864 हिंदू मतदाता थे। SIR के बाद 2026 में गांव में पांच बूथों पर कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 4,523 हो गई। यानी 23 वर्षों में कुल 1,231 मतदाता बढ़े। इनमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में 472 और हिंदू मतदाताओं की संख्या में 757 की वृद्धि हुई। प्रतिशत के लिहाज से मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में करीब 110 फीसदी, जबकि हिंदू मतदाताओं में करीब 29 फीसदी की बढ़ोतरी हुईइस बदलाव का एक पहलू यह भी है कि 2003 में बघाड़ू में हिंदू मतदाताओं की संख्या मुस्लिम मतदाताओं से छह गुने से अधिक थी। 2026 की सूची में यह अंतर घटकर करीब चार गुने का रह गया है। हालांकि, मतदाता संख्या में बदलाव को सीधे तौर पर किसी एक कारण से जोड़ने से पहले प्रशासनिक जांच और अन्य जनसांख्यिकीय कारणों को देखना जरूरी है।

पनौरा में भी बदली मतदाता तस्वीर

सोनभद्र के ही रॉबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के पनौरा गांव में भी मतदाता आंकड़ों में बदलाव दर्ज किया गया है। वर्ष 2003 में यहां कुल 739 मतदाता थे। इनमें 359 मुस्लिम और 380 हिंदू मतदाता शामिल थे।

2026 में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 899 हो गई। यानी 23 वर्षों में 160 मतदाता बढ़े। इनमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 359 से बढ़कर 496, जबकि हिंदू मतदाताओं की संख्या 380 से बढ़कर 403 हुई। इस तरह मुस्लिम मतदाताओं में करीब 32.6 फीसदी और हिंदू मतदाताओं में करीब 8 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई।

जमीन के मामलों से भी जुड़ा है बघाड़ू

बघाड़ू में मतदाता आंकड़ों में बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब गांव में आदिवासी जमीन के हस्तांतरण से जुड़े मामले पहले से जांच के दायरे में हैं। प्रशासन ने कुछ भूमि हस्तांतरणों की वैधता पर कार्रवाई की है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बघाड़ू से जुड़े एक मामले में प्रशासन के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत 40 गाटों की करीब 5.7142 हेक्टेयर जमीन को ग्रामसभा में निहित किया गया था। प्रशासनिक जांच के मुताबिक, वर्ष 2011 से 2023 के बीच जनजातीय भूमि के कई बैनामे एक महिला के नाम कराए गए थे। विवाद के बाद इन जमीनों के हस्तांतरण की वैधता की जांच हुई और प्रशासन ने संबंधित बैनामों को कानूनन शून्य मानते हुए जमीन ग्रामसभा में निहित करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने इस प्रशासनिक कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया।

प्रशासन की नजर अब मतदाता सूची और जमीन रिकॉर्ड पर

मतदाता आंकड़ों में बदलाव के बाद जमीन के स्वामित्व, हस्तांतरण और मतदाता सूची के आंकड़ों को आपस में मिलाकर देखने की मांग उठी है। भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने प्रशासन से राजस्व अभिलेख, जमीन के हस्तांतरण, कब्जे और मतदाता सूची की जांच कराने की मांग की है। यह उनका राजनीतिक दावा है; इसके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जांच से ही होनी है।

वहीं सोनभद्र के जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, बघाड़ू में जनजातीय जमीन से जुड़े मामलों में प्रशासन कार्रवाई कर चुका है। पनौरा में भी भूमि संबंधी मामलों की प्रक्रिया चल रही है। डीएम ने कहा है कि दोनों ग्राम पंचायतों में मतदाताओं की संख्या बढ़ने के कारणों की भी जांच कराई जा रही है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।

जमीन का इस्तेमाल जनहित के कामों में होगा

हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने ग्रामसभा में निहित की गई जमीन के इस्तेमाल की योजना भी बताई है। अधिकारियों के अनुसार, यहां खेल मैदान, बारात घर और बिरसा मुंडा की प्रतिमा जैसे जन उपयोगी कार्य कराने की तैयारी है। बाकी जमीन का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार सरकारी भवनों के लिए किया जा सकता है। फिलहाल बघाड़ू और पनौरा में मतदाता संख्या में हुए बदलाव और उससे जुड़े भूमि मामलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। उपलब्ध आंकड़े यह दिखाते हैं कि दोनों गांवों में 2003 की तुलना में 2026 में मुस्लिम मतदाताओं की वृद्धि दर हिंदू मतदाताओं की वृद्धि दर से अधिक रही, लेकिन इस अंतर के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, इसे लेकर अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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