लखनऊ के ला मार्टिनियर कॉलेज में दरोगा की परंपरा जारी

लखनऊ। आमतौर पर स्कूल में हेडमास्टर का पद सबसे अहम माना जाता है। लेकिन ये जानकर हैरानी होगी कि लखनऊ के स्‍कूल में एक ‘दरोगा’ भी स्कूल के प्रशासन का हिस्सा होता है। इतना ही नहीं, दरोगा पद की यह परंपरा पुश्‍त दर पुश्‍त चली आ रही है। ये अनोखी परंपरा लखनऊ के ला मार्टिनियर कॉलेज में है। कॉलेज ने मोहम्मद फहद अज़ीम को नया दरोगा और एस्टेट सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किया है। अब अज़ीम शहर में कॉलेज की सभी संपत्तियों की देखभाल करेंगे।

28 साल के फहद लॉ ग्रेजुएट हैं। वे अपने परिवार की छठी पीढ़ी हैं जो इस पद को संभाल रहे हैं। उनके परिवार के लोग 19वीं सदी से ये जिम्मेदारी निभाते आ रहे हैं। फहद के परदादा, मियां मच्‍छू, स्कूल की मशहूर इमारत कॉन्सटैंशिया के पहले दरोगा थे। कॉन्सटैंशिया, ला मार्टिनियर कॉलेज के संस्थापक और फ्रांसीसी नागरिक क्लाउड मार्टिन का निवास था। फहद अज़ीम के दादा, एम.एन. अज़ीम ने 2013 में अपनी मृत्यु तक इस पद पर सेवा की। उसके बाद कुछ प्रशासनिक कारणों से ये पद खाली रहा। इसलिए फहद के पिता, ज़िया उल अज़ीम, इस पद पर काम नहीं कर सके।

मियां मच्‍छू को दरोगा बनाने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। 18वीं सदी में क्लाउड मार्टिन फारसी भाषा सीखना चाहते थे। उस समय फारसी भाषा अदालतों की भाषा हुआ करती थी। क्लाउड मार्टिन ने मिया मच्‍छू को अपना शिक्षक चुना। धीरे-धीरे शिक्षक और छात्र का रिश्ता मजबूत हो गया। 1800 में अपनी मृत्यु से पहले, मार्टिन ने मच्‍छू को दरोगा नियुक्त करके सम्मानित किया। साथ ही, उन्होंने इस पद को वंशानुगत बना दिया। इसका मतलब था कि ये पद पीढ़ी दर पीढ़ी मच्‍छू के परिवार को ही मिलेगा। क्लाउड मार्टिन ने अपनी वसीयत में ये भी लिखा कि एस्टेट का जो भी यूरोपीय सुपरिंटेंडेंट होगा, वह मच्‍छू के साथ मिलकर काम करेगा। मार्टिन ने ये बात अपनी 32 पन्नों की वसीयत में लिखवाई थी।

फहद ने कहा, ‘मैं अपने परदादा मियां मच्‍छू, अपने दादा अहमद अज़ीम और अपने दादा एम.एन. अज़ीम की बातें सुनकर बड़ा हुआ हूं। उन दिनों, दरोगा का काम मूल रूप से एक मैनेजर का होता था। मियां मच्‍छू को 80 सिक्का (चांदी) रुपये मिलते थे। वे टीपू सुल्तान के खिलाफ युद्ध में क्लाउड मार्टिन के साथ भी गए थे।’

फहद ने ये भी बताया, ‘दरोगा के पद के लिए कोई रिटायरमेंट की उम्र नहीं है। उनकी मृत्यु के बाद ही उनका बेटा या परिवार का कोई सदस्य इस पद को संभाल सकता है। मार्टिन पुरवा में हमारा एक निजी कब्रिस्तान भी है। वहां मेरे परिवार की पांच पीढ़ियों को दफनाया गया है।’ अब फहद अज़ीम लखनऊ में ला मार्टिनियर की सभी संपत्तियों की देखभाल करेंगे। इसमें क्लाउड मार्टिन का मकबरा, ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज और छत्तर मंजिल शामिल हैं। इन संपत्तियों को क्लाउड मार्टिन की वसीयत के अनुसार सुरक्षित रखना, उनकी देखभाल करना और उनका प्रशासन करना फहद की जिम्मेदारी होगी। लखनऊ मार्टिन चैरिटीज के ट्रस्टी द्वारा जारी किए गए नियुक्ति पत्र में क्लाउड मार्टिन की वसीयत के प्रावधानों का पालन किया गया है। वसीयत में ये स्पष्ट रूप से लिखा है कि दरोगा का पद पीढ़ी दर पीढ़ी नामित परिवारों में ही जाएगा।

कॉन्सटैंशिया एक बहुत ही खास इमारत है। ये फ्रांसीसी नागरिक क्लाउड मार्टिन का निवास था। इसका निर्माण 1785 में शुरू हुआ था। 1800 में क्लाउड मार्टिन की मृत्यु हो गई, लेकिन तब तक घर पूरी तरह से नहीं बन पाया था। उनकी मृत्यु के दो साल बाद, 1802 में इसका निर्माण पूरा हुआ। अपनी मृत्यु से पहले, मार्टिन ने एक वसीयत बनाई थी। इसमें उन्होंने लिखा था कि वे इस संपत्ति को सीखने के केंद्र के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसलिए कॉन्सटैंशिया ला मार्टिनियर कॉलेज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। ला मार्टिनियर कॉलेज की स्थापना 1845 में हुई थी।

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