29 मार्च को है चैत्र मास की अमावस्या

उज्‍जैन। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान, पिंडदान व तर्पण आदि करना अत्यंत शुभ माना गया है। 29 मार्च 2025, शनिवार को चैत्र मास की अमावस्या है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। यह दिन शनि कृपा प्राप्त करने के लिए खास माना गया है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों की जन्मकुंडली में शनि की स्थिति शुभ नहीं है, उन्हें इस दिन कुछ खास उपाय करने चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि दोष से मुक्ति व शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। शनि कृपा प्राप्त करने के लिए शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। उसमें काली उड़द की साबुत दाल, थोड़े काले तिल और एक लोहे की कील डालनी चाहिए।

शनि अमावस्या के दिन काले तिल, काला कंबल, उड़द की दाल और काले वस्त्र गरीबों व जरूरतमंद को दान करना चाहिए। इस दिन पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए और उसके समक्ष दीपक जलाना चाहिए। इस दिन काले कुत्ते को सरसों का तेल लगाकर रोटी खिलानी चाहिए। इस दिन शमी के पेड़ की पूजा करना अत्यंत शुभ फलदायी मानी गई है।

शनि अमावस्या पर गंगा स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। शनि अमावस्या के दिन हनुमान जी को सिंदूर और घी का चोला चढ़ाकर गुड़ और चने का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और शनि कृपा प्राप्त होती है।

शनि अमावस्या के दिन मांस-मदिरा और शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन पूर्वजों या बड़े-बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए। इस दिन कुत्ते, गाय व कौवे आदि पशु-पक्षियों को कष्ट पहुंचाना अशुभ माना जाता है। इस दिन बाल, दाढ़ी व नाखून नहीं काटने चाहिए।

मान्यता है कि ऐसा करने से ग्रह दोष लगता है। इस दिन किसी भी तरह के वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहिए। घर में अशांति का माहौल हमेशा नकारात्मक शक्ति को जन्म देता है। शनि अमावस्या के दिन लोहे का सामान, जूते व शनि संबंधित चीजों की खरीदारी नहीं करनी चाहिए।

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