
नई दिल्ली। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फोनपे का आईपीओ भारतीय घरेलू टेक कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इस आईपीओ के माध्यम से फोनपे 15 अरब डॉलर तक की वैल्यूएशन की मांग कर रही है, जो इसके व्यवसाय और भविष्य की विकास योजनाओं को लेकर एक मजबूत संकेत है। फोनपे ने चार इन्वेस्टमेंट बैंकों को अपने आईपीओ के लिए सलाहकार के रूप में चुना है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी इस आईपीओ को रणनीतिक रूप से प्रबंधित करना चाहती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह आईपीओ प्राइमरी और सेकेंडरी शेयरों का कॉम्बिनेशन हो सकता है, जो निवेशकों को एक विविध विकल्प प्रदान करेगा। अगर फोनपे आईपीओ वित्त वर्ष 2026 में लिस्ट होता है, तो यह भारतीय वित्तीय बाजार के लिए एक बड़ी घटना हो सकती है, खासकर फिनटेक और पेमेंट सेक्टर में। फोनपे का आईपीओ भारतीय टेक कंपनियों के आईपीओ ट्रेंड को और भी मजबूत करेगा, जिससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का ध्यान आकर्षित होगा।
फोनपे का 15 अरब डॉलर तक की वैल्यूएशन पर ध्यान केंद्रित करना दिखाता है कि कंपनी के लिए यह आईपीओ केवल पूंजी जुटाने का तरीका नहीं, बल्कि इसके विकास और भविष्य की रणनीतियों के लिए एक प्रमुख कदम हो सकता है। इसके निवेशकों में वॉलमार्ट, माइक्रोसॉफ्ट, टाइगर ग्लोबल, और अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं का होना भी इसके स्थिरता और विकास की दिशा को और मजबूती प्रदान करता है। यह तथ्य कि वॉलमार्ट फोनपे का मेजॉरिटी शेयरहोल्डर है, फोनपे के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि वॉलमार्ट का वैश्विक नेटवर्क और संसाधन कंपनी को अन्य वैश्विक बाजारों में विस्तार करने में मदद कर सकते हैं। अगर फोनपे आईपीओ सफल रहता है, तो यह भारतीय टेक आईपीओ स्पेस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है और घरेलू और वैश्विक निवेशकों के बीच बड़ा आकर्षण पैदा कर सकता है।