महंगाई दर में गिरावट के बाद भी राहत नहीं

नई दिल्ली। बीते कुछ महीनों में महंगाई दर में गिरावट के बावजूद महंगे खाद्य तेलों से राहत नहीं मिल पा रही है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख खाद्य तेलों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सबसे अधिक तेजी सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली के तेल में देखी गई है। इसी तरह से डेयरी प्रोडक्ट की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसी स्थिति में भविष्य में महंगाई दर में उछाल देखने को मिल सकता है।

मार्च के लिए जारी आरबीआई की रिपोर्ट कहती है कि बीते एक वर्ष में खाद्य मूल्य सूचकांक में 7.1 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। इसके उलट खाद्य तेल से जुड़ा प्राइस इंडेक्स एक वर्ष में 112 से बढ़कर 156 पर पहुंच गया है। जबकि डेयरी उत्पाद के मूल्य से जुड़ा सूचकांक भी 122 से बढ़कर 148 तक पहुंच गया है। आकंड़ों से पता चलता है कि खाद्य तेल और डेयरी उत्पादों की कीमतों में हर महीने इजाफा हो रहा है।

सब्जियों की कीमतो में जरूर उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिस कारण बीते कुछ महीनों के दौरान खुदरा महंगाई में गिरावट देखने को मिली। औसत खाद्य सूचकांक की तुलना में खाद्य तेल और डेयरी उत्पादों की कीमतों में कहीं ज्यादा बढ़ोतरी से साफ है कि लोगों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिहाज से भी चिंताजनक है। क्योंकि खाद्य तेल की कीमतों में इसी दर से बढ़ोतरी होती रही तो गर्मी के सीजन में फल-सब्जियों के दामों में इजाफा होने पर महंगाई दर बढ़ेगी और लोगों का जेब खर्च भी बढ़ेगा।

थाली में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सब्जियों की कीमतों में फसली सीजन में भी बड़ी कमी नहीं आई है। आलू, प्याज और टमाटर की कीमतें मार्च 2023 की तुलना में करीब दो गुना अधिक रही हैं। जबकि मार्च 2024 की तुलना में देखा जाए तब भी कीमतों में तेजी देखने को मिली है। दो वर्ष पहले मार्च के महीने में टमाटर का औसत मूल्य 10 रुपये प्रतिकिलोग्राम के आसपास था लेकिन इस बार औसत मूल्य 19.2 रुपये के आसपास रहा है।

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