एनइसीएम स्कीम : मेक इन इंडिया का है विस्तार

नई दिल्ली। पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी है, जिसके लिए सरकार की तरफ से 22,919 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं, दरअसल अभी तक देश में मेड इन इंडिया स्कीम को बढ़ावा दिया जाता था। यह स्कीम उसी का विस्तार है। मतलब मेड इन इंडिया स्कीम में इलेक्ट्रॉनिक आइटम की भारत में मैन्युफैक्चिरिंग शुरू होती है। लेकिन इसमें दिक्कत यह थी कि इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट को देश में बनाया जाता था, लेकिन उसके पार्ट्स को विदेश से मंगाया जाता था। कहने का मतलब था कि एक तरह से देश में इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट की असेंबलिंग होती थी। लेकिन अब सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट को देश में ही बनाने को बढ़ावा देने के लिए नई स्कीम शुरू की है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के लिए विदेश पर निर्भर न रहना पड़े। उदाहरण के लिए आईफोन मैन्युफैक्चरिंग को ले सकते हैं, जिसे भारत में बनाया जाता है, लेकिन उसके पार्ट्स को चीन, वियतनाम समेत कई अन्य देशों से सप्लाई किया जाता है।

यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट की मैन्युफैक्चरिंग में बड़े पैमाने पर घरेलू और ग्लोबल निवेश के मौकों को बढ़ावा देगी। साथ ही भारतीय कंपनियों को ग्लोबल कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। सरकार को इस स्कीम से 59,350 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। साथ ही 4,56,500 करोड़ रुपये के प्रोडक्शन की उम्मीद है। वही इस स्कीम के आने से देश में 91,600 डायरेक्ट और इन-डायरेक्ट रोजगार के मौके बनेंगे।

यह स्कीम 6 साल के लिए है। इसमें एक साल शुरुआती शामिल है। इस स्कीम के तहत तब पेमेंट किया जाएगा, जब कंपनी रोजगार के टारगेट को पूरा करेगी। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स ग्लोबली सबसे तेजी से बढ़ने वाला कारोबार है जो आर्थिक और तकनीकी विकास के लिए जरूरी है। वित्त वर्ष 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक सामानों का घरेलू प्रोडक्शन 1.90 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9.52 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 17 फीस से ज्यादा चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) हासिल हुई। इसी दौरान निर्यात भी 0.38 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.41 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 20 फीसद से ज्यादा CAGR दर्ज की गई है।

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