भूकंप की पौराणिक कहानियां

दिल्ली-एनसीआर में आज सुबह-सुबह जोरदार भूकंप आने से लोगों के दिन की शुरुआत डर के साए में हुई। दिल्ली-एनसीआर में यह भूकंप करीब 5 बजकर 36 मिनट पर आया था। रिक्टर स्केल पर मापे गए 4.3 तीव्रता वाले भूकंप से धरती कुछ पलों के लिए हिलती गई। जब भी भूकंप आता है, तो लोग वैज्ञानिक कारणों के अलावा भूकंप से जुड़ीं पौराणिक कहानियों पर भी चर्चा करने लग जाते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार भूकंप भविष्य के लिए भी एक बड़ा संकेत देते हैं कि आगे की स्थिति बहुत ही तनावकारी हो सकती है।

एक पौराणिक कहानी के अनुसार इस पूरी धरती को शेष नाग ने अपने फन पर उठाया हुआ है। जब-जब धरती पर पाप बढ़ने लगता है, तो नकारात्मक ऊर्जा धरती से लेकर पाताल तक फैलने लगती है। इस नकारात्मक ऊर्जा से विचलित होकर शेष नाग थककर करवट लेते हैं और भार को कम करने की कोशिश करते हैं, जिससे धरती के भीतर कंपन होता है। वहीं, एक और कहानी के अनुसार भगवान विष्णु का दूसरा अवतार कूर्म है। कूर्म यानी कछुआ। धरती कछुए की पीठ पर टिकी है। इनके हिलने से धरती में कंपन होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भूकंप मनुष्य के लिए एक चेतावनी भी है कि अपने कर्म सुधारकर धरती का बोझ कम करे।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पृथ्वी को एक देवी का दर्जा प्राप्त है। एक बार हिरण्याक्ष नामक असुर ने पृथ्वी को समुद्र में डुबो दिया था। तब भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकाला। इस तरह पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ। पृथ्वी और वराह के प्रेम से मंगल नाम बालक का जन्म हुआ था। पृथ्वी यानी धरती को मंगल की माता माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब-जब पृथ्वी पर बढ़ता पाप का भार देखकर मंगल को क्रोध आता है, तो पृथ्वी पर आगजनी, युद्ध जैसी घटनाएं बढ़ती हैं। मंगल को क्रोधित देखकर धरती माता में भी कंपन होता है। इस कंपन को भूकंप के नाम से जाना जाता है।

एक अन्य पौराणिक कहानी और काशी विश्वनाथ की धार्मिक मान्यता के अनुसार यह काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है। काशी सबसे प्राचीन स्थान है, इसलिए इसे संपूर्ण धरती से जोड़कर देखा जाता है। जब भगवान शिव का त्रिशूल स्थिर रहता है, तो धरती भी स्थिर अवस्था में रहती है लेकिन जब धरती पर मनुष्यों के पाप कर्म बढ़ने लग जाते हैं, तो सृष्टि के विध्वंस कहे जाने वाले महादेव भी क्रोधित होकर अपने त्रिशूल को क्रोध में धरती पर पटकते हैं, जिससे कि धरती का संतुलन बिगड़ने लगता है और धरती में कंपन होता है।

पौराणिक कहानियों के अनुसार ज्योतिष शास्त्र से भी भूकंप की एक मान्यता जुड़ी हुई है। इस मान्यता के अनुसार जब धरती के आसपास घूम रहे ग्रहों की गति में अभूतपूर्व तेजी या कमी आ जाए या कोई ग्रह वक्री हो, तब ऐसे में धरती का संतुलन बिगड़ जाता है जिसके चलते पृथ्वी पर कंपन उत्पन्न होता है। पृथ्वी पर भूकंप आने को ग्रहों के क्रोध से भी जोड़कर देखा जाता है। वहीं, शनि 29 मार्च को मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं।

सभी पौराणिक कहानियों में मनुष्य के बढ़ते पाप कर्म देवताओं, ग्रहों और भगवान के क्रोधित होने की मुख्य वजह है। इस धरती को भगवान ने बनाया है, इसलिए जब मनुष्य धर्म के मार्ग से हटकर स्वार्थ से भरकर केवल बुरे काम ही करता है, तो इससे देवी-देवता भी विचलित हो जाते हैं। जिससे वे समय-समय पर मनुष्य जाति को भूकंप के रूप में चेतावनी देते हैं कि ‘जिस धरती पर रहकर तुम इतने अंहकार में डूबे हो, वो धरती भी अस्थायी है और केवल कुछ पलों का वेग इसे समाप्त करने के लिए काफी है।’ एक अन्य पौराणिक मान्यता यह भी है कि भूकंप भविष्य यानी आगे आने वाले समय के लिए यह संकेत भी है कि अगर मनुष्यों ने अपने बुरे कर्मों को नियंत्रित नहीं किया, तो आगे आने वाले समय में कई और प्राकृतिक आपदाएं धरती का विनाश कर सकती हैं।

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