
जो सत्य है, वही शिव (Shiva) है और शिव (Shiva) ही सुंदर है. यह पौराणिक बात ही जीवन का मर्म है. अपने आस-पास हम जो भी अपनी आंखों से देख पाते हैं और जो इस दिखावे से परे है वह सब कुछ शिव ही है. शिव ही पंचतत्व (Five elements) और पंचभूत के प्राण हैं और जल, अग्नि, वायु, धरती व आकाश का सृजन वही करते हैं. समय आने पर वह इन्हीं पंच भूतों को अलग-अलग करके संहार भी करते हैं।
इसलिए कहा जाता है कि संसार में पदार्थ का चाहे ठोस स्वरूप हो या तरल या फिर भाप ही क्यों न हो, शिव हर रूप में साकार होते हैं। गंगाजल (Ganga water.) शिव की जटाओं से होकर बहता है, अमरनाथ (Amarnath) में शिव खुद बर्फ से आकार पाते हैं और कालिदास (Kalidas) ने तो मेघों को ही शिव स्वरूप बताया है। इन संदर्भों को देखें तो प्राचीन काल से चली आ रही यह बात कि ‘हर कंकर ही शंकर है’ अपने आप में सही साबित होती दिखती है।