शिव और शक्ति के मिलन का महापर्व है महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि शिव और शक्ति का मिलन का महापर्व है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव गृहस्थ जीवन में बंधे थे। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की सच्चे मन से उपासना करता है उस व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती है। साथ ही भगवान शिव की पूजा में सबसे ज्यादा ध्यान आपको पूजन सामग्री का रखना होता है। शिवपुराण के अनुसार,महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। पहला प्रहर स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए दूसरे प्रहर की पूजा धन समृद्धि के लिए तीसरे प्रहर की पूजा संतान सुख की कमाना या फिर कोई भी मनोकामना पूर्ति के लिए। चौथे प्रहर की पूजा मोक्ष और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए।

देश भर में महाशिवरात्रि को एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव का विवाह हुआ था। हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह जगत में रहते हुए मनुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है। पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए हर वर्ष फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस खास अवसर पर देशभर में शिव मंदिरों में महादेव की पूजा विशेष पूजा-अर्चना होती है। साथ ही महाभिषेक किया जाता है। इसके अलावा शिव भक्त महादेव की बारात निकालते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर शिव जी की उपासना और व्रत करने से विवाह में आ रही बाधा से भी छुटकारा मिलता है और जल्द विवाह के योग बनते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना जो व्यक्ति सच्चे दिल से करते हैं उसकी सारी इच्छाएं पूरी होती है। साथ ही जीवन में खुशियां भी आती हैं। इसी के साथ जिन लोगों को विवाह में बाधा आ रही है तो महाशिवरात्रि पर पूजा अर्चना करने से सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं। लेकिन, बेहद जरुरी है की आप पूरा विधि विधान से शिव पूजन करें।

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