हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का है विशेष महत्व

माघ पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर के अनुसार, माघ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है, जो आमतौर पर जनवरी या फरवरी में होती है। यह दिन विशेष रूप से धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसे पवित्र स्नान और दान का दिन माना जाता है। माघ पूर्णिमा का महत्व विशेष रूप से गंगा स्नान के साथ जुड़ा हुआ है, जहां लाखों लोग नदियों के किनारे स्नान करने आते हैं, खासकर गंगा नदी में। यह दिन पुण्य लाभ और सद्गति की प्राप्ति के लिए माना जाता है।

माघ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। इस साल माघ मास की पूर्णिमा 12 फरवरी बुधवार को है। माघ पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, जप और तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में सूर्योदय से पहले स्नान करने से पापों से मुक्ति होती है।

माघ पूर्णिमा पर विभिन्न तीर्थ स्थलों जैसे प्रयागराज (कुम्भ मेला), हरिद्वार, वाराणसी, और ऋषिकेश में बड़ी संख्या में लोग स्नान करने के लिए आते हैं। इस दिन का धार्मिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसे माघ मास में भगवान श्री विष्णु के पूजन का दिन भी माना जाता है। इसके अलावा, इस दिन लोग विशेष रूप से दान देते हैं, जैसे अनाज, वस्त्र, या पैसे, ताकि उनके पुण्य का संचय हो सके।

माघ पूर्णिमा को लेकर खास ध्यान दिया जाता है कि इस दिन स्नान से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। माघ पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन आप भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन करने से मां लक्ष्मी कुपित हो सकती हैं।

इस दिन फटे-पुराने या काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को समर्पिक है। इसलिए इस दिन कटे-फटे या काले रंग के कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता है। माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपकी गुलाबी या लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

माघ पूर्णिमा के दिन घर में अंधेरा नहीं होना चाहिए। कहा जाता है कि घर में अंधेरा होने से मां लक्ष्मी निवास नहीं करती हैं। इस दिन ध्यान रखें कि माघ पूर्णिमा के दिन घर के किसी भी कोने में अंधेरा नहीं रहेगा। 

इस दिन दूध और चांदी का दान करने बचना चाहिए। माना जाता है कि माघ पूर्णिमा पर दूध और चांदी का दान करने से चंद्र दोष लग सकता है और आर्थिक स्थिति भी उत्पन्न हो सकती हैं। 

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