
लखनऊ। लखनऊ में किसी भी योजना के लिए अगर प्राधिकरण किसी जमीन का अधिग्रहण करता है तो तुरंत उसका ब्यौरा प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। जमीन के ब्यौरे के साथ ही तसहील, गांव, गाटा संख्या और खतौनी का ब्यौरा भी दर्ज होगा। पोर्टल पर ब्यौरा अपलोड होने से लोग एक क्लिक में अधिग्रहीत जमीन की जानकारी लेकर ठगों से बच सकेंगे।
एलडीए के प्लॉटों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आने और भटगांव में डिफेंस कॉरीडोर मामले में जमीनों में हुए घालमेल के बाद मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने एलडीए के अफसरों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि प्राधिकरण जिस जमीन का अधिग्रहण करे, उसका जमीन का ब्यौरा, तहसील व गांव का नाम और गाटा संख्या व खतौनी प्राधिकरण के पोर्टल पर अपलोड करे, ताकि जालसाज उस जमीन को अधिग्रहीत न बताकर सौदा न कर सकें।
ऐसे कई मामले में मंडलायुक्त के सामने आए, जिनमें जमीनों के अधिग्रहण होने के बावजूद ठगों ने उसे किसान की जमीन बताकर दूसरों को बेच दी और उसकी जमा पूंजी गटक गए। ऐसे ठगी को रोकने के लिए मंडलायुक्त ने प्राधिकरण को अपने पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
एलडीए वीसी को भेजे पत्र में उन्होंने यह भी कहा है कि अधिग्रहीत भूमि की खतौनी में पोर्टल पर प्राधिकरण का नाम दर्ज होना चाहिए, ताकि देखने वालों को मालूम हो सके कि जमीन एलडीए की है। पोर्टल अपडेट होने से लोग भूलेख की कंप्यूटराइज्ड प्रति निकालकर भी जमीन की असलियत जान सकेंगे। एलडीए जिस जमीन को अधिग्रहीत करे, मौके पर जाकर वहां एलडीए का साइन बोर्ड भी लगाए। अगर किसी अधिग्रहीत जमीन पर पुरानी आबादी या पब्लिक यूटिलिटी से जुड़ा निर्माण सामने आए तो संबंधित अधिकारी उसे प्राधिकरण की बैठक में जरूर रखें, ताकि उसका निस्तारण किया जा सके।
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