सनातन गर्व, महाकुम्भ पर्व

शिल्पा सिंह

संस्कृतियों के महाकुंभ 2025 संगम का भव्य शुभारंभ शनिवार को पौष पूर्णिमा से हो रहा है। करीब सभी अखाड़े हाथी, घोड़ा, ऊंट के लाव-लश्कर, गाजे-बाजे और त्रिशूल व भाले के साथ छावनी प्रवेश कर चुके हैं। किसी ने राजसी वैभव तो किसी ने पेशवाई के रंग में प्रवेश किया हैं। महाकुंभ की अमृतमयी त्रिवेणी की बूंदों के स्पर्श से जीवन को धन्य बनाने के लिए शैव, शाक्त व वैष्णव परंपरा के सभी अखाड़ों की छावनी गंगा की रेती पर सज रही हैं।

ज्ञात हो कि पौष पूर्णिमा 13 जनवरी से दुनिया के सबसे बड़े मेले महाकुंभ की शुरुआत होने जा रही है तो 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन समापन होगा। इस त्याग और समर्पण से भरे मेले का आयोजन हर 12 साल में होता है, लेकिन कुंभ शुरू होने के पहले ही कई लोग विवाद खड़े करने में जुट गए थे। कहीं समाजवादी पार्टी बेवजह बयानबाजी कर रही है तो कहीं मुस्लिम धर्मगुरु। एक लुक्खे ने कहा है कि कुंभ मेला वक्फ की जमीन पर लगाने में विरोध न कर के मुसलमानों ने बड़ा दिल दिखाया है, जिस पर साधु-संत व नेता उबल पड़े।

उनका कहना है कि जब इस्लाम पैदा नहीं हुआ था, तब से कुंभ लगने का इतिहास रहा है। सिरफिरों की इस तरह की सिरफिरी बातें सिर ही फिराएंगी। बड़ा दिल दिखाना ही था तो अयोध्या, काशी व मथुरा में दिखाते। सिर्फ तीन ही तो मांगे थे और यह दिन भी न देखना पड़ता ? अब तो हर शहर और कस्बे में मंदिर निकल रहे हैं। ये मामले एक दिन हल होकर रहेंगे, क्योंकि अब हम जाग गए हैं। मुस्लिमों द्वारा दुकान लगाने पर एक नेता ने कहा कि अमृत काल में अभी वहां किसी विधर्मी की जरूरत नहीं है, क्योंकि खाने की चीज में थूक सकते हैं।

इस बीच कुंभ में जब मुसलमानों की एंट्री बैन करने की मांग हो रही है, तब मो. कैफ संगम के ठंडे पानी में डुबकी लगा रहे हैं। वायरल वीडियो कैफ ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर 29 दिसंबर को पोस्ट किया था और लिखा भी था यहीं सीखी थी बचपन में तैराकी। बयानबाजियों के बीच साधु-संतों ने कैफ के संगम में डुबकी लगाने की तारीफ की और कहा है कि रहीम व रसखान के वंशजों से कठमुल्लों को सीखने की जरूरत है।

क्रिकेटर ने सकारात्मक संदेश देकर न सिर्फ बधाई का काम किया है, बल्कि कट्टरपंथियों के मुंह पर तमाचा भी मारा है कि पूर्वजों को डराकर भले ही मत परिवर्तित कर दिया गया हो, अल्पसंख्यक बना दिया गया हो, पर पुरानी मां की गोद में आए हैं, क्योंकि अंदर से आज भी वही हूं, जो पहले था। कैफ ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर एक नए इतिहास की नींव रखी है। ज्ञात हो कि 1980 में पैदा हुए कैफ प्रयागराज के कीडगंज मोहल्ले के पुराना बाशिंदा हैं।

उधर, विधर्मियों के प्रवेश व दुकान लगाने पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर व डासना देवी मंदिर के पीठाधिश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती एवं बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री फायर हैं। साधु-संतों के साथ उन्हें समाज का भी अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। वे कहते हैं कि जब हम मक्का और मदीना में प्रवेश नहीं कर सकते हैं तो फिर कमोबेश हर पल देश विरोधी गतिविधियों में शामिल गद्दारों व मक्कारों का महाकुंभ में प्रवेश प्रतिबंधित ही होना उचित है।

उधर, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का कहना है कि इस बार कुंभ में आधार कार्ड के आधार पर ही प्रवेश दिया जा रहा हैं ताकि गैर सनातनी को रोका जा सके, क्योंकि सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा हो गया है क्योंकि रोज देश में रेलवे लाइन पर ईंट-पत्थर, खंभे व सिलेंडर रखे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हर बार आयोजन से पहले संत समाज बैठक करके कई जादूगरों व विवादित बाबाओं तक के प्रवेश पर भी रोक लगाता रहा है।

दूसरे, जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम) के प्रदेश सलाहकार मौलाना काब रशीदी ने कहा है कि ऐसा पहली बार है, जब कुंभ आयोजन के सिलसिले में मुसलमान चर्चा के केंद्र में है। यह नाइंसाफी है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड केमहासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा है कि अगर कोई मुसलमान ज्ञानवर्धन के लिए जाना चाहता है तो रोकना नहीं चाहिए। प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मोहसिन रजा कहते हैं कि हम भी कई बार गए हैं, व्यवस्था में हजारों मुसलमान योगदान दे रहे हैं और आरएसएस प्रमुख ने भी बयान दिया है कि कुछ लोग विवाद खड़ा करके नेता बनना चाहते हैं।

दूसरी ओर, हल्के और मोटे बजट के श्रद्धालुओं के लिए आठ तरह के टेंट की तंबू नगरी बसाई गई है तो नौ फर्जी वेबसाइट लेकर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। वे कम पैसे में टेंट बुकिंग का ऑफर दे रहे हैं। आयोजन में अवसर ढूंढ़ चुके चार चांडाल गिरफ्तार भी किए गए हैं तो एक विदेशी को भी प्रपत्रों में कमी के चलते पकड़ा गया है। उक्त पर आरोप है कि नौ वेबसाइट तैयार करके सौ से अधिक लोगों से 36 लाख की ठगी कर चुके हैं टेंट, कॉटेज एवं होटल बुकिंग के नाम पर।

पुलिस को अभी तक सिर्फ पांच फीसदी से भी कम रकम होल्ड करने में सफलता मिली है। पुलिस के मुताबिक 54 वेबसाइट अभी तक ब्लॉक की जा चुकी हैं। डीजीपी प्रशांत कुमार ने भी वीडियो जारी कर अधिकृत वेबसाइट से ही बुकिंग करने की श्रद्धालुओं को सलाह दी है। इस बार काफी कुछ खास व नया हो रही है। कुछ ऐसी चीजें भी की जा रही हैं, जो पहले कभी नहीं की गईं। कुछ ऐसी ही कारणों से कोई डिजिटल महाकुंभ की संज्ञा दे रहा है तो कोई पर्यावरण महाकुंभ की।

कनाडा में बैठे सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरु पतवंत सिंह पन्नू ने वीडियो जारी कर गीदड़ भभकी दी कि बब्बर खालसा-केजेडएफ के पीलीभीत में मारे गए तीन आतंकियों का बदला कुंभ में लेंगे। उसने इसके लिए सीएम को जिम्मेदार ठहराया है। इस पर संतों ने कहा है कि कोई आए, हम सबके लिए तैयार हैं। हजारों कैमरों से सैकड़ों वर्ग किमी में फैले पूरे मेला मैदान को कवर किया गया है। साथ ही कंप्यूटर व एआई आधारित व्यवस्था के तहत हजारों करोड़ की लागत से अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए गए हैं, जो आतंकियों वमाफिया की फेस रिकग्निशन कर सिस्टम को सूचना देंगे।

चैटबॉट से होगी श्रद्धालुओं की मदद और फेस रिकग्निशन से पकड़े जाएंगे आतंकी। इस बारे में देश के दूसरे राज्यों से 200 से अधिक मोस्टवांटेड बदमाशों व आतंकियों के फोटो मांगे गए हैं, उनके मेला क्षेत्र के कैमरों में दिखते ही सायरन बजने लगेगा और उन्हें ट्रैप कर लिया जाएगा। पुलिस ने भी सात स्तरीय सुरक्षा चक्रव्यूह तैयार किया है। सौ करोड़ से मेले को जिला घोषित कर चार तहसीलों, आठ जोन व 18 सेक्टर में बांटा गया है। दर्जनों आईपीएस व पीसीएस भी तैनात किए गए हैं। 13 अस्थायी व 44 स्थायी थाने एवं 23 अस्थायी चौकी बनाई गई हैं।

बम निरोधक दस्ते के अलावा पांच कंपनी पीएसी, चार टीम एनडीआरएफ, 12 टीम एएस चेक व चार टीम बीडीडीएस तैनात की गई हैं। 21 कंपनी सीएएसएफ तैनात की गई है तो दो कंपनी रिजर्व में रखी गई हैं। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ, क्यूआरटी के अलावा इंसीडेंट रेस्पॉन्स सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है। इसे सैकड़ों राजस्व अधिकारियों व कर्मियों से गठित किया गया है, जो कि किसी भी आपात स्थिति में निपटने में सक्षम होगी। बीते हफ्ते एक अस्थायी अस्पताल के छोटे से हिस्से में आग लगी। इसमें कोई खास नुकसान नहीं हुआ, उल्टे सभी का ट्रायल हो गया। महाकुंभ के महा मेले के लिए और बड़ी जगह की जरूरत थी तो ड्रेजिंग एक्सपर्ट उड़ीसा, बिहार और बंगाल से बुलाए गए थे।

ड्रेजिंग का काम बक्सर घाट (डौंडियाखेड़ा के पास) पर चंद्रिका माई मंदिर के सामने आठ-नौ वर्ष पहले नमामि गंगे के तहत लोकल ठेकेदार कर रहा था। गंगा मैया की बड़ी दया है कि बालू पर डिजाइनर टेंट सिटी बसाने के लिए डिजाइन एक्सपर्ट खाड़ी के रेगिस्तानी देशों से नहीं बुलाए गए। ऐसी बातें इसलिए करनी पड़ रही हैं क्योंकि बजट ही इतना है। दृष्टांत के लिए करीब 40 करोड़ से तो श्रृंगवेरपुर में निषादराज पार्क बन रहा है। कई एकड़ में फैले पार्क के चारों कोनों पर चार टॉयलेट ब्लॉक सिर्फ एक करोड़ की लागत से बनाए गए हैं।

शायद महाकुंभ के दौरान इसके ताले खुल रहें हैं, बाकी बाद में तो ताले ही रहेंगे रेलवे स्टेशन की तरह, तब तक उनकी मरम्मत के लिए दोबारा बजट आ जाएगा और चूने से पुताई करके उसे आराम से फिर अंदर कर लेंगे। उधर, कई करोड़ का ठेका तो पुरानी बसें रंगवाने का है। राशन वितरण प्रबंधन का ठेका 48 करोड़ का है तो पीआर के बजट का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। प्रचार-प्रचार के लिए बड़े-बड़े नेता देश के सभी प्रमुख महानगरों में रोड शो कर न्योता देकर लौट आए हैं। कुछ लोगों को हाथों-हाथ भी दिए गए हैं। साथ ही पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपए से हजारों होर्डिंग लगाए गए हैं और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को लाखों के रोज विज्ञापन दिए जा रहे हैं।

2100 करोड़ रुपए तो अकेले केंद्र सरकार ने आवंटित किए हैं। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के कपड़े उतरवाने के लिए 900 वर्ग फीट की खाने-पीने की एक दुकान का किराया 92 लाख रुपए तय किया है अलंबरदारों ने सिर्फ 40-45 दिन के लिए 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं की आगमन संख्या बताकर। यह पहले से डेढ़ गुना बताया जा रहा है। चूंकि महाकुंभ को प्रदेश का 76वां जिला घोषित किया गया है तो उसके लिए भी 100 करोड़ रुपए रखे गए हैं। महाकुंभ सिर्फ 6400 करोड़ रुपए के बजट से नहीं सफल हो जाएगा, इससे भी कहीं ज्यादा जरूरी है आचमन के लायक गंगाजल। इसे राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने गंदा करार देते हुए एक लाइन में एक संबंधित जिले के डीएम से यह पूछकर पूरी मशीनरी को ही हाल में निपटा दिया था कि क्या आप कानपुर से आगे के प्रवाह मार्ग का गंगाजल पी सकते हैं?

उन्नाव-कानपुर की टेनरी बंद करवाने व सीधे गंगा जी में गिर रहे सदियों से कुख्यात नालों की टेपिंग की कवायद हर बार की तरह बड़का बाबू ने करवा दी है। उन्होंने गंगाजल के बारे में घटाई गई एनजीटी की गाइडलाइंस की भी दबे स्वर में निंदा की और कहा कि इसीलिए मानक पर खरा नहीं है। किमियागर ने एनजीटी के मानक के बारे में कहा है कि समस्या मानक को ऊंचा कर देने से हुई है, नहीं तो गंगा जल ठीक था, जबकि इसी जल के कारण विभागीय एसीएस मनोज सिंह को रिटायरमेंट से चंद हफ्ते पहले पद से हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि गंगा को गंभीरता से नहीं लेने के कारण कई साल पहले प्रधानमंत्री की गुड बुक के बाहर हो चुकी हैं तत्कालीन केंद्रीय मंत्री उमा भारती। दरअसल आबादी जितनी ज्यादा होगी, उतना ही ज्यादा खाएगी, खपाएगी, पचाएगी और मल-मूत्र (टेनरी के जानवरों का भी) बहाएगी, फिर यह सब गंगा जी में जाएगा, जिसे केवल नालों का मर्जर करके एसटीपी बनाकर ही रोका जा सकता है। उदाहरण के लिए कानपुर की साइड कम से कम दो व उन्नाव की साइड एक एसटीपी की बात कहते हुए 10 साल बीत चुके हैं।

अगर हर टेनरी या फैक्ट्री वाला बनवा भी देगा और चालू भी होगा तो उसके यहां से निकला पानी नाले में दूसरों के पानी से गले मिलते ही गंदा हो जाएगा इसलिए केंद्रीयकृत एसटीपी ही एकमात्र इलाज हो सकता है। नमामि गंगे के तहत करोड़ों रुपए से दर्जनों घाट बनवाने से कुछ नहीं होने वाला। इसके विपरीत बालू के देसी एसटीपी (बड़े बंधे) यदि बनवा दिए गए होते तो कब का भला हो गया होता?

उधर, किमियागर के कारिंदे कुख्यात नालों का गंदा पानी गिरने के पहले वाले गंगा जल का नमूना जांच के लिए भेजा था, क्योंकि कानपुर से पश्चिम का जल ठीक माना जाता है व मानकों पर कुछ खरा है। उधर, गंगा में औद्योगिक उत्प्रवाह गिरने से रोकने के लिए यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि जिन उद्योगों में सूखा व गीला काम एक साथ किया जाता है, वे रोस्टर अवधि में पूरी तरह बंद रहेंगे। यानी कि कानपुर व उन्नाव के टेनरी व डाइंग उद्योग। पूरी तरह से सूखा काम करने वाले व एसटीपी आधारित उद्योग चलेंगे।

तीर्थराज प्रयाग के मलाका में 26 नवंबर 2020 से देश के दूसरे सबसे बड़े 10 किमी लंबे छह लेन वाले ब्रिज को बनाने का काम शुरू हुआ था। इसमें करीब चार किमी पुल गंगा जी पर बनना था। महाकुंभ-2025 के लिए यह बहुत जरूरी था क्योंकि गंगा जी पर बना 50साल पुराना पुल जर्जर हो चुका था। दूसरे, बिना वैकल्पिक रास्तों के सिर्फ एक रास्ते से करोड़ों श्रद्धालुओं का संगम तक पहुंचना आसान नहीं है। इसे फरवरी – 2024 तक पूरा करना था, पर इसका भी हाल ब्यूरोक्रेसी की लापरवाही के कारण गंगा एक्सप्रेस-वे जैसा ही हुआ। इसी कारण विकल्प में एक अस्थायी लोहे का ब्रिज बनाया जा रहा है। यह लगभग तैयार है आवागमन के लिए।

यह दीगर बात है कि निर्माण की तीन तारीखें निकल चुकी हैं। लखनऊ, अयोध्या और पश्चिमी यूपी के जिलों से आने वाले लोग फाफामऊ पुल के जरिए शहर में पहुंचते हैं। भीड़ के मद्देनजर यह संकरा है, सो अक्सर जाम लगा रहता है। इसी कारण सिक्स लेन पुल का ऐलान हुआ था। 26 नवंबर 2020 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व योगी आदित्यनाथ ने इसका शिलान्यास किया था। 9.9 किमी लंबे पुल के लिए1948 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था। इसे बनाने का जिम्मा एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था।

जर्मन टेक्नोलॉजी से बन रहा सिक्स लेन पुल केबल और बॉक्स पर आधारित है। करीब 3840 मीटर का हिस्सा गंगा नदी और कछार एरिया पर बनना है। इसके लिए 67 पिलर भी तैयार हो गए थे, पर बाकी काम बाकी रह गया। पुल के ऊपर रेस्टोरेंट भी बनाने की योजना है। फरवरी 2024 के बाद, नई डेट जून-24, जुलाई-24 एवं फिर अगस्त-24 दी गई। इसके बावजूद छह माह बीत चुके हैं और कुंभ भी शुरू होने को है, पर बन नहीं पाया। कंपनी के हाथ खड़े करने के बाद शासन और स्थानीय प्रशासन के सामने समस्या खड़ी हुई कि अगर भीड़ को पुराने रास्ते से गुजारा गया तो कैसे मैनेज किया जा सकेगा, क्योंकि 40 करोड़ में से करीब 15 करोड़ श्रद्धालुओं के फाफामऊ पुल से ही आने की उम्मीद है।

आनन-फानन उसके ठीक बगल में अस्थायी स्टील ब्रिज बनाने का ऐलान किया गया, जो कि सिर्फ मेले के लिए होगा। इसके बाद उखाड़ दिया जाएगा। अगर नहीं उखाड़ा गया तो बाढ़ में उसके गंगा में समाने का डर बना रहेगा। स्टील ब्रिज तक पहुंचनेके लिए करीब तीन किलोमीटर सड़क तैयार की गई है। गंगा जी पर कुल 426 मीटर ब्रिज बन रहा है। दो बड़ी क्रेन, 100 वर्कर और एक दर्जन के करीब वेल्डर फिनिशिंग टच में लगे हुए थे। इसे भी वही कंपनी बना रही है, जो 10 किमी ब्रिज तय समय पर नहीं बना पाई। पहले तय हुआ कि अक्टूबर 24 में बन जाएगा, फिर 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री के आने से पहले, फिर 31 दिसंबर का वादा और अब 13 जनवरी 25 का। देरी के लिए एक कर्मी ने गंगा की गहराई को जिम्मेदार बताया इसलिए 10-12 पिलर का काम बाकी था।

पुल से करीब डेढ़ लाख गाड़ियों को पार्क किया जा सकता है। संगम की दूरी यहां से 10 से 12 किमी है। संपर्क मार्ग पर मिट्टी और गिट्टी पर रोलर दौड़ रहे थे। शुरुआत का तीन किमी से कम हिस्सा कंप्लीट हो गया था। करीब 60 करोड़ व 4500 टन लोहे से बन रहे पुल की चौड़ाई है 16 मीटर। इंजीनियर ने बताया कि कुंभ खत्म होने के बाद इसे तोड़ा जाएगा। फिर सरकार व कंपनी की सहमति से तय किया जाएगा कि लोहे का क्या होगा? इंजीनियर के इस सवाल ने प्रदेश के जागरूक लोगों के सामने बहुत बड़ा नया सवाल खड़ा कर दिया है। टेंट सिटी तो रेंट पर बसाई जाती है तो उखाड़ ले जाता है टेंट वाला। बाद में जो करोड़ों का कबाड़, करोड़ों की लागत के हजारों कैमरे, करोड़ों केविद्युत पोल, बल्व, एलईडी, टिन, प्लाई, बांस व वीआईपी के पैरों के नीचे बिछाए जाने वाले भदोही के नर्म कालीन बचते हैं, हर बार उसका मेले के बाद क्या होता है? क्या किसी के घर या ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने के काम आते हैं या बैंक बैलेंस को बढ़ाने में।

उदाहरण के लिए अगर कोई बांस घोटाला तक कर दे तो करोड़पति बनना तय है, क्योंकि एक खबर में बताया गया है कि महाकुंभ में बांस इतना लगा है कि उसे अमेरिका तक बिछाया जा सकता है और वापसी में वहां से तीर्थराज तक। अगर कंपनी तय समय पर काम पूरा कर लेती तो जनता के लोहे के पुल के बेशकीमती 60 करोड़ बच जाते, लेकिन बचाना है ही किसे ? उनका तो ध्येय है कि एक भी पैसा बचकर जाने न पाए। चूंकि लोहा सरकारी है तो 20 करोड़ से ज्यादा का नहीं बिकेगा। आदमी का होता तो पक्का आधे पर बिक जाता। प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी का ट्रेंड देखकर आराम से कहा जा सकता है कि पुल अभी तैयार नहीं हुआ है, पर किसी किमियागर ने आपूर्तिकर्ता फर्म या कबाड़ी से औने-पौने दाम में खरीदने या बायबैक का सौदा जरूर कर लिया होगा।

उसे तो एक कागज पर साइन भर करना है, जिस पर लिखा होगा कि पुल चोरी हो गया, गर्मी में गल गया या बाढ़ में बह गया। जरूरत पर यह भी साबित कर देगा कि साइन उसके नहीं हैं, किसी ने फर्जी किए हैं। ज्ञात हो कि 6400 करोड़ वाले इस मेले में दिसंबर पहले हफ्ते तक 5600 करोड़ खर्च हो चुके थे। बचे हुए पैसे से लखनऊ से लेकर प्रयागराज तक रोड डिवाइडर के हजारों खंभों पर ई-तितली व झिलमिलाती दिल जलाती झालर लगाने के बजाय क्यों न वे पैसे किराए के भुगतान की मद में अभी से डाल दिए जाएं ताकि बाद में किसी लल्लू एंड संस को शासन से लेकर हाईकोर्ट तक के चक्कर न काटने पड़ें।

ज्ञात हो कि दशकों से कुंभ की टेंट सिटी वही बसाते रहे हैं। सदी के दूसरे कुंभका उनका किराया बाकी था, जिसे लेकर काफी थू-थू हुई थी और बात ने शासन होते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। उधर, संस्कृति विभाग ने 10000 की क्षमता वाला गंगा पंडाल तैयार किया है, जहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की त्रिवेणी बहेगी डेढ़ माह तक। शास्त्रीय गायन, वादन, रामलीला-कृष्णलीला, नृत्य नाटिका और कवि सम्मेलन आदि होंगे तो ऊषा उत्थुप, कविता कृष्णमूर्ति, सुरेश वाडेकर, सोनल मान सिंह, हरिहरन, शंकरमहादेवन, साधना सरगम, नितिन मुकेश, श्वेता मोहन व कैलाश खेर को भी प्रस्तुति के लिए बुलाया गया है।

पर्यावरण महाकुंभ की दिशा में आरएसएस ने भी एक कदम बढ़ाया है। प्लास्टिक कचरे से बचाने के लिए सात से 10 लाख थैले से थाली बांटने का लक्ष्य तय किया है, जबकि अनुमान के मुताबिक तैयारी से समापन तक करीब दो-तीन माह में पांच से आठ अरबथाली की जरूरत पड़ सकती है। संघ की दृष्टि से देश में 911 जिले हैं और 6663 खंड। हर खंड से औसतन 500 थाली व इतने ही थैले जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। महाकुंभ की विशिष्टता में शामिल है नागाओं की दुनिया। महानिर्वाणी के पहुंचने के बाद से मेला क्षेत्र करीब 10 हजार नागाओं से गुलजार हो चुका है। कोई नहीं जानता कि ये आते कहां से हैं और जाते कहां हैं।

प्रमुख स्नान

13 जनवरी पौष पूर्णिमा

14 जनवरी मकर संक्रांति

29 जनवरी मौनी अमावस्या

03 फरवरी बसंत पंचमी

12 फरवरी माघी पूर्णिमा

26 फरवरी महाशिवरात्रि

महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश

संगम की रेती पर आस्था के रंग बिखरे हुए हैं। कोई अक्षय पुण्य के निमित्त अनवरत साधना में अभी से लीन है तो कोई जप-तप के साथ धूनी रमा रहा है। एक माह से कम समय में एक बार पीएम व तीन बार सीएम का दौरा हो चुका है, सो शासन व प्रशासन दिन-रात मुश्तैद है। पीएम ने मन की बात में कहा कि महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश व गंगा की अविरल धारा, न बंटे समाज हमारा। महाकुंभ ऐसा आयोजन है, जहां कोई भेद नहीं होता। कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। अनेकता में एकता का ऐसा उदाहरण विश्व में कहीं नहीं देखने को मिलता है।

हमारा कुंभ एकता का महाकुंभ भी है। करीब 40 करोड़ से अधिक तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए 40 हजार से अधिक कर्मचारी भी ड्यूटी संभालने के लिए पहुंच चुके हैं, जो नहीं पहुंचे हैं, उन पर कार्रवाई की तलवार चलाई जा रही है तो रिजर्व कर्मियों से संख्या पूरी की जा रही है। कोई भी पार्किंग जैसे ही कैपेसिटी से ज्यादा होगी तो अलार्म बज जाएगा। यह प्रयोग पहली बार हो रहा है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मेले के लिए कुल 102 पार्किंग स्पॉट बनाए गए हैं।

ज्यादातर कछार एरिया में हैं। एक साथ पांच लाख कार की पार्किंग की व्यवस्था की गई है तो पहले की तुलना में घाटों की लंबाई डेढ़ गुना यानी आठ से बढ़ाकर 12 किमी की गई है क्योंकि श्रद्धालु आगमन पिछली बार से ज्यादा तय है। साथ ही पैरा मोटरिंग, हॉट एयर बैलूनिंग, अखाड़ा वाक व कल्पवासी क्षेत्र भ्रमण की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन निगम की एमडी सान्या छाबड़ा ने बताया कि 3000 में आठ मिनट की हेलीकॉप्टर राइड की सुविधा पहली बार शुरू की गई है। अरैल टेंट सिटी के पास हेलीपैड बनाया गया है। उधर, इलाज की बात करें तो एआई का इस्तेमाल पहली बार किया जाएगा।

नॉर्थ-ईस्ट से लेकर साउथ व गल्फ से लेकर अमेरिका तक के श्रद्धालुओं को इलाज की जरूरत पर कोई भाषायी दिक्कत न हो इसलिए एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। एआई मेसेजिंग एप 22 भारतीय व 19 विदेशी भाषाएं समझ लेगा। उधर, केंद्र सरकार के भी कई महकमों ने कमर कस रखी है। हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्री के राम मोहन नायडू ने हाल ही में एयरपोर्ट विस्तारीकरण का जायजा लिया व बताया कि इस बार कम दृश्यता में विमानों का आवागमन हो सकेगा। इसके लिए कैट टू लाइट एक्टीवेट कर दी गई है। विमानों को नाइट लैंडिंग की सुविधा दी गई है तो आठ शहरों भुवनेश्वर, गुवाहाटी, दिल्ली, कोलकाता, चंडीगढ़, जयपुर, जबलपुर व देहरादून के लिए 10 जनवरी से सीधी सेवा भी।

रेलवे की तैयारी की बात करें तो शहर के सभी स्टेशनों पर पहली बार सीसीटीवी कैमरों के साथ एफआर कैमरे लगाए गए हैं, जो एआई की मदद से संदिग्ध गतिविधियों व अराजकतत्वों पर नजर रखेंगे। चार गेट पर क्यूआर कोड स्कैन करने का भी प्रयोग पहली ही बार किया जा रहा है। रेलवे ने जहां कुंभ रेल सेवा एप विकसित कराया है, वहीं 11 जनवरी तक 60 लंबी दूरी की महाकुंभ स्पेशल ट्रेन चला रहा है तो साढ़े 13 हजार ट्रेन 45 दिन में चलाने की तैयारी की है।

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