इन सीटू मटेरियल हेट्रोजेनिटी के कारण भूकंप के तेज झटके

नई दिल्ली। सोमवार सुबह दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सों में 4.0 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। ये झटके इतने तेज थे कि लोगों में दहशत फैल गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने बताया कि इसकी वजह ‘इन-सीटू मटेरियल हेट्रोजेनिटी’ है। आसान भाषा में समझें तो जमीन के नीचे अलग-अलग तरह की मिट्टी और चट्टानें होती हैं, जिनकी वजह से भूकंप के झटके तेज महसूस होते हैं। ये प्लेट टेक्टोनिक्स से अलग कारण है, जिससे दिल्ली में भूकंप का खतरा बढ़ जाता है।

दिल्ली में आए भूकंप के झटके क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं में प्राकृतिक बदलाव के कारण थे। यानी जमीन के नीचे की संरचना में अंतर की वजह से ऐसा हुआ। तो आखिर ये ‘इन-सीटू मटेरियल हेट्रोजेनिटी’ क्या है? इसका मतलब है कि एक ही जगह पर जमीन के नीचे अलग-अलग तरह की मिट्टी, चट्टानें और खनिज पदार्थ मौजूद हैं। मान लीजिए कहीं जमीन के नीचे ढीली मिट्टी है और कहीं सख्त चट्टान, तो भूकंप के झटके अलग-अलग तरह से महसूस होंगे।

हालांकि 4.0 तीव्रता का भूकंप मध्यम श्रेणी का माना जाता है, लेकिन इसकी गहराई सिर्फ 5 किमी थी और यह घनी आबादी वाले इलाके के पास आया, इसलिए इसका असर ज्यादा महसूस किया गया। अगर भूकंप जमीन के नीचे बहुत गहराई में आता, तो उसके झटके सतह तक आते-आते कमजोर हो जाते, लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं हुआ।

आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले छोटे-छोटे झटके। विशेषज्ञों का कहना है कि कम गहराई वाले भूकंप, जो 10 किमी से कम गहराई पर आते हैं, ज्यादा तेज महसूस होते हैं क्योंकि भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने में ज्यादा दूरी तय नहीं करनी पड़ती। इसके अलावा, भूकंप का केंद्र शहर के अंदर ही था, जिससे इसका असर और भी बढ़ गया, खासकर ऊंची इमारतों में, जो भूकंप के दौरान हिलने के लिए डिजाइन की जाती हैं।

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