
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि देश अब आर्थिक गतिविधियों को हथियार बना रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा क्योंकि पिछले एक दशक में हर तरह की आर्थिक गतिविधि का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ट्रेड वॉर की धमकी के बीच जयशंकर ने यह बात कही। जयशंकर ने बुधवार को कहा कि टैरिफ और प्रतिबंध अब एक सच्चाई हैं, चाहे किसी को पसंद हो या नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप टैरिफ के जरिए ट्रेड वॉर की धमकी दे रहे हैं। इस माहौल में जयशंकर ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पहले की तुलना में कम संयम है। यह एक ऐसी बात है जिस पर सभी देशों को ध्यान देना होगा।
जयशंकर ने कहा, ‘चाहे हमें पसंद हो या नहीं, ये एक सच्चाई है। देश इनका इस्तेमाल करते हैं। वास्तव में, अगर हम पिछले दशक को देखें, तो मुझे लगता है कि हमने लगभग हर तरह की क्षमता या आर्थिक गतिविधि को हथियार बनते देखा है। यह वित्तीय प्रवाह, ऊर्जा आपूर्ति या तकनीक कुछ भी हो सकता है, ये दुनिया की सच्चाई है।’
भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस है। भारत, ट्रंप प्रशासन की टैरिफ धमकी से बचने के लिए उनके साथ एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने आगे कहा कि इस हथियार के बनने की स्थिति से निपटने के कई तरीके हैं। उनमें से एक है ‘हथियार की सही साइड पर रहना ताकि आपको चोट न लगे’। मतलब, अपनी आर्थिक नीतियों को इस तरह से बनाएं कि दूसरे देशों के फाइनेंशियल एक्शन का आप पर कम असर हो।
उधर, यूएस सरकार ने तिब्बती सरकार जो निर्वासन में चल रही है, उसकी आर्थिक मदद रोक दी है। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। तिब्बती सरकार-निर्वासन की संसद के सदस्य अपना बजट बनाने में मुश्किलों का सामना कर रहे। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि US सरकार की तरफ से तय किए गए खर्च के लक्ष्यों को कैसे पूरा किया जाए। 2025-26 के लिए 367.5 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। लेकिन इसमें कटौती की जाएगी क्योंकि US ने तिब्बती सरकार-निर्वासन को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोक दी है।
अमेरिका, तिब्बती सरकार-निर्वासन के बजट का 40 फीसदी से 50 फीसदी हिस्सा देता था। US से मिलने वाली लगभग आधी रकम USAID के जरिए आती थी। ट्रंप सरकार USAID को बंद करना चाहती है। CTA के अध्यक्ष पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि फंडिंग में कमी को पूरा करने के लिए सभी विभागों में कटौती की जाएगी। इसका मतलब है कि तिब्बती सरकार-निर्वासन को अपने खर्चों में कटौती करनी होगी।