
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के विरोध को ‘नाटक’ करार दिया है, जो कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बारे में शाह की टिप्पणियों को लेकर था। फड़णवीस ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी संसद का समय बर्बाद कर रही है और शाह की टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से यह भी कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने एक गंभीर मुद्दे को अनावश्यक रूप से विवादित किया। इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को भी रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि गांधी परिवार ने डॉ. अंबेडकर का लगातार विरोध किया था।
फडणवीस का यह बयान महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकता है, क्योंकि डॉ. अंबेडकर भारतीय समाज और राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उनके प्रति सम्मान की बात राजनीतिक बहस का कारण बन सकती है, और यह मामला अब राष्ट्रीय राजनीति में भी एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है।
पत्रकारों से बात करते हुए, फड़णवीस ने अपना रुख दोहराते हुए कांग्रेस के देशव्यापी विरोध को महज नाटकबाजी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को पहले गृह मंत्री अमित शाह के बयान को संपादित करने और उस पर राजनीति करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने संसद सत्र को खराब कर दिया। इसके साथ ही फड़णवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अपने भाषण के दौरान जिस तरह से कांग्रेस की पोल खोली, कैसे नेहरू से लेकर इंदिरा, राजीव से लेकर सोनिया तक कांग्रेस ने लगातार संविधान का अपमान किया।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है, खासकर डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति कांग्रेस के रवैये को लेकर। एक भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस अब हताश है, क्योंकि उनके नेता, जिनमें पंडित नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक शामिल हैं, ने संविधान का अपमान किया और आरक्षण को नकारा। उनका आरोप था कि कांग्रेस का यह रवैया अब उजागर हो चुका है और वे इसी हताशा में ऐसी हरकतें कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास दलितों और वंचितों के अपमान से भरा हुआ है। उनका कहना था कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति अपनाई, जिससे दलितों और वंचितों को उनके अधिकारों से वंचित रखने की कोशिश की गई। योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने भारत का विभाजन करने में भूमिका निभाई, और जवाहरलाल नेहरू नहीं चाहते थे कि डॉ. अंबेडकर संविधान सभा का हिस्सा बनें।
यह बयान एक राजनीतिक विवाद को और उकसा सकता है, खासकर तब जब डॉ. अंबेडकर के योगदान और उनके विचारों को लेकर पूरे देश में भावनाएँ जुड़ी हुई हैं। भाजपा के इस आरोप के बाद कांग्रेस को अपने पुराने रवैये पर प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि यह बयान देश में सामाजिक न्याय, आरक्षण और दलित अधिकारों के मुद्दों को और गरम कर सकता है।