यूसीसी का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ : कांग्रेस नेता

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) सरकार द्वारा लाई गई समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का उद्देश्य केवल “राजनीतिक लाभ” प्राप्त करना है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि यह कदम किसी वास्तविक सामाजिक या कानूनी सुधार की बजाय सिर्फ चुनावी फायदे के लिए उठाया गया है।

हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार इस मुद्दे को उठाकर समाज में ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है, जिससे चुनावी लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इसके बजाय राज्य के वास्तविक मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई, और विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। रावत ने कहा कि समान नागरिक संहिता एक राज्य का मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा, यूसीसी राज्य का मुद्दा नहीं है। नाम से ही पता चलता है कि इसका मतलब पूरे देश के लिए एक समान नागरिक संहिता से है। अगर हर राज्य अपने कानून बनाएगा, तो यह एक समान कैसे होगा?

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में संविधान पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा था कि उत्तराखंड की तर्ज पर भाजपा शासित हर राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनवरी 2024 में राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस लगातार जारी है, जिसमें विपक्षी दलों का कहना है कि यूसीसी को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और सहमति जरूरी है।

रावत ने यह तर्क दिया कि यदि समान नागरिक संहिता में किसी समुदाय को बाहर रखा जाता है, तो यह सच्चे अर्थों में समानता का प्रतीक नहीं हो सकता। उनका यह भी कहना था कि अगर यूसीसी लागू किया जाता है तो इसे सभी समुदायों के बीच समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, न कि किसी विशेष समुदाय को इससे बाहर किया जाए। समान नागरिक संहिता को लेकर रावत ने यह भी कहा कि इसे लागू करने से पहले विभिन्न समुदायों के बीच विचार-विमर्श और सहमति बनानी चाहिए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार का विवाद न हो।

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