डिंपल यादव ने महिलाओं की भूमिका पर दिया जोर

लखनऊ। भगवान ने पहले पुरुषों को ही बनाया होगा क्योंकि पहली बार में गलती हो जाती है। फिर दूसरी बार में महिलाओं को बनाया गया होगा। डिंपल यादव ने जब यह बात कही तो सभागार में हंसी के ठहाकों के साथ ही तालियां भी गूंजने लगी। समाजवादी पार्टी की महिला सभा की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में डिंपल ने यह बात कही, जिसके बाद अखिलेश यादव ने भी अपनी सरकार में महिलाओं के लिए किए गए कामों के बारे में जिक्र किया।

लखनऊ में सपा की महिला सभा की तरफ से राजधानी लखनऊ में महिला सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। अखिलेश और डिंपल की मौजूदगी में इसमें विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह ने सम्मानित किया। डिंपल ने महिलाओं और पुरुषों की तुलना और उनके संघर्ष को लेकर बात रखी।

डिंपल यादव ने कहा- ऐसी चर्चा चलती है कि पहले पुरुष आए या फिर महिलाएं। तो मुझे ऐसा लगता है कि भगवान ने पहले पुरुषों को ही बनाया होगा क्योंकि पहली बार में गलती हो जाती है। मगर दूसरी बार भागवान ने महिलाएं बनाई हैं और जो कैपेबिलिटी महिलाओं को दी है और जिस तरह से महिलाएं पहली बार तो परिवार में जन्म लेती हैं और फिर दूसरे परिवार में जाकर और वहां पूरे परिवार को संभालती हैं और अगर वो प्रोफेशन में आ जाएं तो परिवार को संभालने के साथ वो अपने सपने को भी पूरा करती हैं।

डिंपल ने कहा कि समाज में जेंडर डिफरेंस आज भी है। समाज में पुरुषों के सपनों की कीमत ज्यादा होती है। महिलाओं के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा। डिंपल ने आगे कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को और अधिक ताकतवर बनाने की आवश्यकता है। जब महिलाएं आगे बढ़ेंगी, तभी समाज और देश प्रगति करेगा।

सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं के बिना समाज की प्रगति अधूरी है। हमें हर क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर और सुरक्षा देनी होगी। समाजवादी पार्टी देश की आधी आबादी के साथ है। उन्होंने कहा कि डिंपल ने ये बहस छेड़ दी कि कौन पहले धरती पर आया। यहां किसी भी चीज पर बहस शुरू हो जाती है। जो लोग टीवी देखते हैं वो 400-500 साल पहले के इतिहास में कोई होंगे।

भारत में नारी का सम्मान पहले से होता आया है, भगवान श्री कृष्ण के धरती छोड़ने के बाद धरती पर कलयुग आया। एक समय ऐसा था जब महिलाओं को वोट का अधिकार नहीं था। महिलाओं को एक समय शिक्षा का भी अधिकार नहीं था।

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