
नई दिल्ली। कांग्रेस के सीनियर लीडर शशि थरूर ने यह बात मान ली है कि रूस-यूक्रेन जंग को लेकर उनका भारत के रुख की आलोचना करना गलत था। थरूर ने कहा कि भारत की स्थिति के कारण ही वह ऐसी खास जगह पर आकर खड़ा है, जिससे स्थायी शांति हासिल करने में मदद मिलेगी। दरअसल, पहले शशि थरूर ने भारत के तटस्थ रुख की आलोचना की थी। उन्होंने भारत से रूस की निंदा करने का आग्रह किया था। इसके पीछे का कारण उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन होने और यूक्रेन की संप्रभुता को बताया था। लेकिन अब उन्होंने रायसीना डायलॉग में कहा कि भारत दोनों देशों से बात कर सकता है और शांति स्थापित करने में मदद कर सकता है।
थरूर ने कहा,’मैं अपनी पुरानी स्थिति से निकलने की कोशिश कर रहा हूं।’ यानी उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया है। थरूर ने कहा कि भारत के दृष्टिकोण ने देश को यूक्रेन और रूस दोनों के साथ जुड़ने की अनुमति दी है। इससे भारत इस युद्ध में एक संभावित मध्यस्थ बन गया है।
केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि भारत सरकार के रुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित कर दिया है, जो यूक्रेन और रूस दोनों के राष्ट्रपतियों के साथ बातचीत कर सकते हैं। इससे शांति की कोशिशों के अवसर बन सकते हैं।
थरूर ने आगे कहा,’भारत दुनिया में अपनी खास स्थिति को देखते हुए शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। अगर रूस और यूक्रेन के बीच कोई समझौता होता है, तो भारत शांति सैनिकों को भेजने के लिए तैयार हो सकता है। खासकर तब, जब रूस ने नाटो देशों के यूरोपीय शांति सैनिकों को अस्वीकार कर दिया है।’
कांग्रेस नेता ने यह स्पष्ट किया है कि विपक्षी नेता होने के नाते वह सरकार की तरफ से नहीं बोल सकते। उन्होंने भारत के शांति स्थापना के लंबे इतिहास पर भी जोर दिया। थरूर ने बताया कि भारत ने 49 से ज्यादा मिशन किए हैं और अगर जरूरत पड़ी तो देश वैश्विक स्थिरता में योगदान करने के लिए तैयार रहेगा।