
सपा नेता ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्रों पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने मुस्लिम महिला मतदाताओं से उनके बुर्के हटवाने के लिए दबाव डाला, जिससे महिलाएं भयभीत हो गईं। यह कदम, अगर सही साबित होता है, तो महिलाओं के व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन होगा। इसके परिणामस्वरूप, कई महिलाएं मतदान केंद्रों से बिना अपना मत डाले लौट आईं, और बड़ी संख्या में सपा समर्थकों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किए बिना मतदान केंद्र छोड़ दिए। इसके कारण मतदान में गिरावट आई, जो एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक हो सकती है। यह घटना विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी है, क्योंकि बुर्का या हिजाब पहनना किसी महिला का व्यक्तिगत अधिकार है और इसे किसी भी प्रकार से जबरन हटवाना उनके संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। भारतीय संविधान में सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक पहचान के अनुसार जीने का अधिकार है, और यह अधिकार महिलाओं के लिए भी लागू होता है। यदि पुलिस अधिकारियों ने इस अधिकार का उल्लंघन किया, तो यह एक बड़ा विवाद उत्पन्न कर सकता है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की नौ सीटों को लेकर हो रहे उपचुनाव को लेकर सियासत तेज है। सभी सीटों पर अब प्रचार भी थम चुका है। समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग से कहा है कि ऐसी व्यवस्था स्थापित करें जिससे मतदान के दिन कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी मतदाता की आईडी की जांच न करे। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कई पोलिंग बूथों पर मुस्लिम महिलाओं को डराने धमकाने का काम किया गया। इसके अलावा समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि नौ सीटों पर वोटिंग खत्म हो जाने के बाद एजेंट को कुल मतदाता के पड़े वोट कीरी जानकारी की प्रमाणिकता की कॉपी उपलब्ध कराई जाए। चुनाव आयोग को समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामपाल की तरफ से ये पत्र लिखा गया है और पार्टी की मांग को सामने रखा गया है। इस पत्र के जरिए इस संबंध में संबंधित अधिकारी, जिला अधिकारी, सामान्य प्रेषक, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किया जाए।
समाजवादी पार्टी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान मतदान केंद्रों पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने अपनी शक्ति और पद का दुरुपयोग किया और सपा समर्थकों, विशेषकर मुस्लिम महिला मतदाताओं से उनके बुर्का हटवाए, जिससे महिलाओं में डर पैदा हो गया। उन्होंने कहा कि उनमें से कई लोग वोट डाले बिना ही मतदान केंद्रों से चले गए। बड़ी संख्या में सपा समर्थक अपने मताधिकार का प्रयोग किए बिना लौट आए, जिससे चुनाव प्रभावित हुआ और मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या में गिरावट आई। इस तरह के गंभीर आरोपों के बाद, चुनाव आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि मतदान केंद्रों पर किसी प्रकार का ध्यान केंद्रित दबाव या भय उत्पन्न करना हुआ है, तो आयोग को तत्काल जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्वाचन प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतंत्र हो। इसके साथ ही, यदि पुलिस के कुछ अधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है, तो उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान यह आरोप कि पुलिस अधिकारियों ने सपा समर्थकों और विशेषकर मुस्लिम महिलाओं को परेशान किया और उनके मताधिकार का प्रयोग करने से रोका, यदि सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन सकते हैं। चुनावों के दौरान किसी भी प्रकार की धार्मिक, सांस्कृतिक या लिंग आधारित भेदभाव से बचना चाहिए, ताकि प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने का अवसर मिल सके। चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि आगामी चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ईमानदारी और निष्पक्षता बनी रहे।