
करहल विधानसभा उपचुनाव में सपा और मुलायम परिवार के बीच अंदरूनी संघर्ष ने चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है। समाजवादी पार्टी, जो इस सीट को हमेशा अपने प्रभाव क्षेत्र में मानती रही है, अब खुद को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में पा रही है, क्योंकि सपा के भीतर ही पारिवारिक मतभेद सामने आ गए हैं। मुलायम सिंह यादव के परिवार के दो सदस्य—अखिलेश यादव और उनके भाई अनुजेश यादव—अब चुनावी रण में आमने-सामने हैं, जो पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट की ओर इशारा करता है।
इस समय, अखिलेश यादव के लिए यह सवाल अहम बन गया है कि क्या वह अपने पारिवारिक विवादों के बावजूद इस सीट को बचा पाएंगे या नहीं। भाजपा ने अनुजेश यादव को अपना प्रत्याशी बनाकर यादव वोट बैंक में सेंधमारी करने का दांव चला है। खास बात यह है कि अनुजेश की पत्नी संध्या यादव और सपा सांसद धर्मेंद्र यादव भाई-बहन हैं, और अब वे अपने पति के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, जो सपा के लिए एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है।
इसके अलावा, संध्या की सास और पूर्व विधायक उर्मिला यादव भी पूरी ताकत से प्रचार में जुटी हैं। सास-बहू की जोड़ी ने यादव मतदाताओं के बीच हलचल मचा दी है, और इसने सपा के लिए मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यादव परिवार की आंतरिक राजनीति और मतों के बिखराव का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
बीजेपी इसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है और यादव वोट बैंक में विभाजन के जरिए करहल में जीत की संभावना देख रही है। इस अंतर्द्वंद और चुनावी मुकाबले ने जनता में यह चर्चा भी पैदा कर दी है कि क्या अखिलेश यादव अपने परिवार को एकजुट रख पाएंगे या फिर मुलायम सिंह यादव के जमाने का असर खत्म हो जाएगा।
करहल उपचुनाव में यह पारिवारिक कलह न सिर्फ सपा के लिए संकट पैदा कर रही है, बल्कि यह बीजेपी के लिए एक सुनहरी अवसर बन गई है, जिससे वह यादव वोट बैंक में सेंधमारी कर सकती है। चुनावी मौसम में यह विवाद और भी गरमाता जा रहा है, जिससे दोनों पक्षों के लिए जीत का मार्ग और भी जटिल हो गया है।