
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा में बताया कि पिछले सात सालों में देश भर के विभिन्न हाई कोर्ट्स में कितने अन्य पिछड़ा वर्ग और कितने एससी-एसटी समुदाय या अन्य समुदाय के जज नियुक्त हुए हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने एक सवाल के जवाब में बताया कि अल-अलग उच्च न्यायालयों में 2018 से नियुक्त 715 न्यायाधीशों में से 22 अनुसूचित जाति, 16 अनुसूचित जनजाति, 89 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से और 37 अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक सवाल के जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय और 25 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्तियां संविधान के प्रावधानों के तहत की जाती हैं, जो किसी भी जाति या वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं करता है। यानी इन अदालतों में जजों का नियुक्ति में कोई आरक्षण का प्रावधान नहीं है। बावजूद इसके जज अपने मेरिट से इन पदों पर पहुंचे हैं।
मेघवाल ने कहा कि सरकार सामाजिक विविधता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2018 से, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के पद के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों को निर्धारित प्रारूप में अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि का विवरण प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘‘सिफारिश किए जाने वाले लोगों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर 2018 से उच्च न्यायालय में नियुक्त 715 न्यायाधीशों में से 22 अनुसूचित जाति के, 16 अनुसूचित जनजाति के, 89 अन्य पिछड़ा वर्ग के और 37 अल्पसंख्यक हैं।’’
मंत्री ने कहा कि सरकार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध करती रही है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजते समय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाओं से संबंधित उपयुक्त उम्मीदवारों पर उचित विचार किया जाए, ताकि नियुक्तियों में सामाजिक विविधता सुनिश्चित हो सके।