
नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित होने के बाद गुरुवार को राज्यसभा में पेश होने जा रहा है हालांकि, राज्यसभा में केंद्र सरकार को ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। एनडीए में शामिल जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी का समर्थन मिलेगा। संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू आज दोपहर एक बजे राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल को पेश करेंगे। राज्यसभा में इस समय 236 सांसद हैं, जिस वजह से यहां बहुमत के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ती है। राज्यसभा में बीजेपी के 98 सांसद हैं।
संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की बात करें तो यहां सदन की मौजदा स्ट्रेंथ 236 सदस्यों की है। इसमें बीजेपी का संख्याबल 98 है। गठबंधन के लिहाज से देखें तो एनडीए के सदस्यों की संख्या 115 के करीब है। छह मनोनीत सदस्यों को भी जोड़ लें जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में ही मतदान करते हैं तो नंबरगेम में एनडीए 121 तक पहुंच जा रहा है जो विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 119 से दो अधिक है। कांग्रेस के 27 और इंडिया ब्लॉक के अन्य घटक दलों के 58 सदस्य राज्यसभा में हैं।
कुल मिलाकर विपक्ष के पास 85 सांसद हैं। वाईएसआर कांग्रेस के नौ, बीजेडी के सात और एआईएडीएमके के चार सदस्य राज्यसभा में हैं। छोटे दलों और निर्दलीय मिलाकर तीन सदस्य हैं जो न तो सत्ताधारी गठबंधन में हैं और ना ही विपक्षी गठबंधन में। किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को ये बिल लोकसभा में पेश किया था, जिसे विपक्ष के हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था। जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इससे संबंधित संशोधित बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी।
सत्तापक्ष का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे का अधिकार मिलेगा। वक्फ की संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और इससे मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मदद मिल सकेगी।
बता दें कि इससे पहले वक्फ संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो गया है। वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में वोटिंग हुई, जिसमें 464 कुल वोटों में से 288 पक्ष में और 232 विरोध में रहे। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर 12 घंटे से ज्यादा समय तक बहस चली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विपक्ष के सांसदों ने अपने-अपने पक्ष रखे। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा और फिर राष्ट्रपति के पास अप्रूवल के लिए भेजा जाएगा।